Digital Arrest Fraud: चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट ठगी का खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार

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Chandigarh News: चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट ठगी का खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार

38 लाख की साइबर धोखाधड़ी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह बेनकाब

  • चीन से जुड़े तार, क्रिप्टो में बदलता था पैसा, अधिकांश रकम होल्ड
  • मास्टरमाइंड फजल रॉकी चेन्नई से करता था संचालन

चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। Digital Arrest Fraud: चंडीगढ़ साइबर अपराध पुलिस थाना ने वीरवार को बड़ी सफलता हासिल करते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पदार्फाश किया। पुलिस ने इस मामले में पंजाब, चंडीगढ़ और चेन्नई से कुल छह आरोपियों- वीना, धर्मेंद्र, सुखदीप, सतनाम, मुकेश और गिरोह के मास्टरमाइंड फजल रॉकी को गिरफ्तार किया है। Chandigarh News

ऐसे दिया ठगी को अंजाम

पीड़ित ने शिकायत में बताया कि 7 जनवरी 2026 को शाम करीब 5:50 बजे उसे अज्ञात नंबरों से कॉल आए, जिनमें कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित के कार्ड को मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़ते हुए गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती और घर से बाहर निकलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए पुलिस वर्दी पहने व्यक्ति ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट और दस्तावेज भेजे।

फिर एक अन्य कॉल सीबीआई निदेशक नाम से आई, जिसमें आधार कार्ड के दुरुपयोग की बात कही गई। लगातार डर और दबाव में आकर पीड़ित ने आरटीजीएस के माध्यम से 38 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। पीड़ित और उसकी पत्नी को 7 जनवरी की शाम से 8 जनवरी की शाम तक कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।

जांच में सामने आए अहम खुलासे | Chandigarh News

जांच के दौरान बैंक खातों की केवाईसी और लेन-देन का विश्लेषण किया गया। 8 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ के एक बैंक खाते से 4.50 लाख रुपये चेक के जरिए निकाले गए, जो दूसरे स्तर के फ्रॉड से जुड़े थे। यह खाता वीना रानी के नाम पर पाया गया। तकनीकी निगरानी के आधार पर 9 जनवरी को उसे सेक्टर-32, चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने 4.40 लाख रुपये कमीशन के बदले अपने साथियों को सौंपे। इसके बाद सेक्टर-45 स्थित बुड़ैल में छापामारी कर धर्मिंदर, सुखदीप और सतनाम को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का काम मुकेश उर्फ प्रिंस करता था। बाद में तकनीकी इनपुट के आधार पर मुकेश उर्फ प्रिंस को भी गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में सामने आया कि पूरे नेटवर्क को चेन्नई से फजल रॉकी संचालित कर रहा था, जिसे वहां से गिरफ्तार किया गया।

फजल रॉकी ने खुलासा किया कि वह टेलीग्राम के जरिए कुछ चीनी नागरिकों के संपर्क में था। उन्हीं के निर्देश पर पैसे निकासी और क्रिप्टो में बदलने की प्रक्रिया की जाती थी। प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर आरोपी 10% कमीशन लेते थे। एनसीआरपी पोर्टल और गृह मंत्रालय के सहयोग से पीड़ित की अधिकतम राशि बैंक खातों में होल्ड कर दी गई है। सभी जब्त मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और बैंक खातों को साइबर फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। मामले की गहन जांच जारी है।

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