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    विवाद ने बढ़ाया फैज का क्रेज

    Faiz ahamad Faiz
    Faiz ahamad Faiz

    युवाओं में किताब खरीदने की होड़  | Craze of Faiz

    नई दिल्ली (एजेंसी)। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में पिछले 20 दिनों से देशव्यापी प्रदर्शनों का दौर चल रहा है। कानपुर आईआईटी में पाकिस्तान के इंकलाबी शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘हम भी देखेंगे’ को लेकर काफी विवाद उठा। विवाद के कारण यह नज्म सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ। नई पीढ़ी के बीच विश्व पुस्तक मेले में फैज की किताबें खरीदने की होड़ (Craze of Faiz) नजर आ रही है। 28 वें पुस्तक मेले में सभी बड़े एवं महत्व पूर्ण हिंदी प्रकाशकों ने फैज की किताबें अपने स्टाल पर रखीं हैं। लेकिन अभी भी हिंदी में फैज की कोई जीवनी नही है और फैज की रचनावली नहीं छपी है।

    आखिर विरोध क्यों? जानने के लिए पढ़ना शुरू किया  | Craze of Faiz

    मेले में पाठकों ने बताया कि कानपुर आईआईटी की घटना और सोशल मीडिया पर फैज साहब की नज्म को हिन्दू विरोधी और भारत विरोधी बताए जाने पर पढ़ना शुरू किया। सोशल मीडिया पर फैज की नज्म हम देखेंगे। इतनी वायरल हुई कि गार्गी प्रकाशन के दिगम्बर ने उसका भोजपुरी अनुवाद किया। मुम्बई के कवि बोधिसत्व ने हिंदी अनुवाद किया। यही नहीं कहानीकार विवेक मिश्र ने उस नज्म की तर्ज पर एक नज्म लिखी। पत्रकार मयंक सक्सेना ने उसकी पैरोडी बनाकर हम फेकेंगे लिखा। उस नज्म को रेडियो जॉकी साइमा ने भी गया जिसका वीडियो बहुत वायरल हुआ।

    1960 में पहली बार हिन्दी में प्रकाशित हुई फैज की रचनाएं  | Craze of Faiz

    पुराने हिंदी प्रकाशक राजपाल एंड संस ने 1960 के करीब पहली बार फैज की किताब हिंदी में प्रकाशित की थी। तब तक फैज की रचनाएं हिंदी में नही आई थी। 60 सालों में फैज गालिब के बाद भारत मे सबसे लोकप्रिय शायर हो गए। राजपाल एंड संस की मालिक मीरा जौहरी ने कहा कि 1960 के आसपास मेरे पिता विश्वनाथ मल्होत्रा ने सर्वप्रथम फैज को हिंदी में छापा। दरअसल उर्दू के लोकप्रिय शायरों की एक श्रृंखला शुरू की। उन्होंने और उसके संपादक प्रकाश पंडित थे। जिनका उर्दू के तमाम बड़े शायरों से निजी रिश्ते थे। यह श्रृंखला बहुत लोकप्रिय हुई। तब हर साल इसके नए संस्करण निकले। फैज की किताब के अनगिनत संस्करण निकले। उन्होंने बताया कि उनके चाचा दीनानाथ मल्होत्रा ने हिन्द पैकेट बुक्स की शुरूवात की। तब एक रुपए में पेपर बैक में किताबें बेचनी शुरू कर दीं।

    • हिन्द पॉकेट बुक्स के गिरिश गोयल 73 में यहाँ नौकरी पर आए थे।
    • उस समय एक रुपये में फैज की शायरी की किताब मिलती थी।
    • इस तरह फैज् के भारत में लोकप्रिय होने का किस्सा शुरू हुआ।
    • देखते-देखते फैज पाकिस्तान में ही नहीं भारत में भी मशहूर हो गए।
    • अब तो फैज दुनिया भर में मशहूर हैं।
    • उनकी जन्म शती लंदन में बड़े पैमाने पर मनाई गई।

     

    जल्द आएंगी नई किताबें  | Craze of Faiz

    • राजकमल प्रकाशन, वाणी प्रकाशन एवं नई किताब ने भी हिंदी में फैज की किताबें छापी।
    • लेकिन कापी राइट के कारण उनकी रचनावली नहीं छप सकी।
      अशोक माहेश्वरी ने बताया कि राजकमल प्रकाशन से उनकी चार किताबों पहले से छपी हुई हैं।
    • फैज, सारे सुखन हमारे, प्रतिनिधि कवितायें, और मेरे दिल मेरे मुसाफिर पहले से छपी हैं।
    • अब तीन और किताबें इस मेले में कल परसों तक आ रही हैं जिसमें से दस्ते-सबा और नक़्शे फरयादी भी शामिल है।
    • उनकी नज्मों और गजलों का संकलन भी।
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    • Dispute increased the craze of Faiz