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    मुजफ्फरनगर में प्राचीन शिव मंदिर पर कब्जे का विवाद, पुजारी परिवार पर बढ़ा दबाव

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    Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में प्राचीन शिव मंदिर पर कब्जे का विवाद, पुजारी परिवार पर बढ़ा दबाव

    मुजफ्फरनगर (सच कहूँ/अनु सैनी)। Muzaffarnagar News: सरवट गेट उत्तरी क्षेत्र स्थित करीब 70-80 वर्ष पुराने प्राचीन शिव मंदिर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ असामाजिक व अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने बिना किसी चुनाव के अवैध रूप से समिति गठित कर मंदिर पर कब्जा जमा लिया है।

    करीब छह दशक से मंदिर की देखरेख दिवंगत पुजारी श्री नारायण दत्त बसालियाल का परिवार करता आ रहा है। वर्तमान में दिवंगत भास्करानंद बसालियाल की पत्नी सरस्वती देवी अपने दो पुत्रों आयुष और पीयूष के साथ वहीं रह रही हैं। आयुष मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्य संभालते हैं। आरोप है कि अवैध समिति के सदस्य लंबे समय से पुजारी परिवार का मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। चार माह पूर्व मंदिर का शौचालय भी तोड़ दिया गया था। अब परिवार पर मंदिर खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसको लेकर शिवसेना और स्थानीय लोग विरोध दर्ज करा रहे हैं तथा प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। Muzaffarnagar News

    एक वर्ष पूर्व तक मंदिर का प्रबंधन शिव मंदिर सभा द्वारा किया जा रहा था, लेकिन बाद में दबंगों ने शिव मंदिर धर्मशाला समिति गठित कर मंदिर परिसर को अपने कब्जे में ले लिया। आरोप है कि इस समिति ने मंदिर की आय और जीर्णोद्धार के नाम पर मंदिर भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि उसी दिशा में दूसरे सम्प्रदाय की आबादी अधिक है। इससे क्षेत्रीय लोगों में असंतोष बढ़ा है।

    स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर प्रांगण में पूजित पीपल देव को भी अवैध रूप से काटने का प्रयास किया गया। शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई रोकी, लेकिन तब तक पेड़ का काफी हिस्सा काटा जा चुका था। इस घटना से श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश है।

    लोगों का यह भी आरोप है कि अवैध समिति मंदिर की आय-व्यय का कोई लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं करती और बिना आम सभा की मंजूरी के नक्शा पास कराकर निर्माण कार्य करवा रही है। वहीं मंदिर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक निर्माण पर भी विवाद है, जिस पर दूसरे समुदाय के कबाड़ी ने वर्षों से कब्जा किया हुआ है।

    स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मंदिर की संपत्ति और अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। साथ ही पश्चिमी और पूर्वी द्वार की ओर सड़क पर अवैध कब्जे और गंदगी की समस्या भी बनी हुई है, जिस पर समिति की कथित साठगांठ बताई जा रही है। Muzaffarnagar News

    क्षेत्रीय श्रद्धालुओं और संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर मंदिर और पुजारी परिवार को संरक्षण प्रदान किया जाए।

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