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    परीक्षा में नंबर कम आ गए तो मायूस न हों

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अब पढ़ने वाले बच्चे, नंबर कम आ गए, माँ-बाप ने कहा था कि नंबर कम आ गए तो देख लेना। इस पर आपको एक हँसने वाली बात सुनाते हैं। कहने का मतलब आप टैंशन ना लिया करो। एक बच्चा था, उसके नंबर कम आते थे। तो उसका बाप कहने लगा कि ओए अगली बार अगर नंबर कम आए या तू फेल हो गया तो मुझे बाप मत कहना। वो चुप रहा। अब रिजल्ट आ गया। उसका बाप बैठा ही था, आया उसके पास। तो बाप ने कहा, हाँ… क्या हुआ? कहता रमेश जी मैं तो फेल हो गया।

    क्योंकि उसने कहा था कि बाप मत कहना, बाप का नाम था रमेश। तो हम ऐसा नहीं कहते कि आप फेल हो जाओ। कहने का मतलब कि अगर नंबर कम आ गए तो कोई आसमान नीचे नहीं गिर गया, अगली बार फिर सही। मेहनत कीजिये, उसको अपने दिल पर लगा लो कि हाँ, इस बार कम आए हैं, मेरे बराबर वाले मैरिट में पहुंच गए, वो भी गर्भ से जन्मे हैं और मैं भी कोई ऊपर आसमान से नहीं टपका, तो अगली बार ऐम (लक्ष्य) बना लो, गैरत बना लो, यकीन मानो आपकी भी मैरिट आ जाएगी। आत्महत्या किसी चीज का कौन सा हल है? माँ, जिसने गर्भ में रखा उसका क्या दोष है भाई? हे बच्चो! जिसने नौ महीने गर्भ में रखा है।

    आपको छोटी सी बात लगती है तो आप डेढ़-दो किलो की र्इंट पेट पर बांधकर दो-तीन दिन सो कर देख लो। चल फिरकर देख लो। तीन किलो की र्इंट पेट पर बंधी हो और आप सो कर दिखा दो। नहीं सो पाओगे। अरे माँ ने नौ महीने पेट में रखा है, क्या वो इसलिए कि आत्महत्या करके उसको दु:ख दे जा। बाप ने परवरिश की, सपने बुने कि मेरा बेटा बड़ा होकर मेरा ऐसे साथ देगा, ऐसे मुझे खुशियां देगा, क्या ये कुठाराघात नहीं कर रहे आप।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि माँ-बाप को भी बच्चों को इतना ज्यादा प्रेशराइज नहीं करना चाहिए कि देख लेना अगर नंबर कम आए तो ऐसा हो जाएगा, वैसे हो जाएगा। पढ़े-लिखे कुछ ज्यादा ही प्रेशर डालते हैं। गाँवों में हमने देखा कि अनपढ़ परवाह नहीं करते। वो कहते, ‘पुत्त ढंग नाल पास हो जीं’, हमने जो देखा, आज भी ऐसे ही होता होगा, कि बेटा जी पास हो जाना, अच्छे नंबर ले आना। और ज्यादा जो पढ़-लिखकर कढ़ जाते हैं माँ-बाप, ख़ुद की मार्कशीट नहीं दिखाएंगे कि कितने नंबर लिए थे, या तो वो दिखा। वो दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी अगर आप इंटेलिजेंट हैं तो नेच्युरली सेल वैसे ही जाएंगे बच्चे में और वो भी इंटेलीजेंट बनेगा।

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि क्या आपने कभी अपने बच्चे के संगी-साथियों का ध्यान दिया है? उसका संग तो गलत नहीं। कहीं गलत संग में तो नहीं फंस गया। क्या आपने उसको कभी टाइम दिया है? कभी चैक किया है? उनके टीचरों के पास, मास्टरों के पास 15 दिन के बाद, महीने के बाद उसकी रिपोर्टिंग की है? कि बताओ मेरा बच्चा पढ़ाई में कैसा है? स्कूल में उसकी कितनी हाजरियां हैं? 15 दिन में चैक करते रहो।

    पता चल जाएगा कि वो स्कूल में ही जाता या कहीं और तो नहीं जाता 15 दिनों के बीच में। और पता चलेगा तो चैक करो और प्यार से हैंडल करके अगर वो गलत सोहबत में पड़ गया है तो उसकी वो गलत सोहबत हटवा दो। अगर आप माँ-बाप ये सब कर रहे हो तो हकदार बनते हो बच्चे को कहने के कि बेटा नंबर अच्छे ले आना। और अगर आप उनको टाइम ही नहीं देते। आप तो अपने आप में मस्त हैं। आपका बिजनेस है, व्यापार है, ऐशोआराम है, आप तो उसमें खोए हैं। पर, आपको गैरत है कि मेरा बेटा कम नंबर कैसे ले आया? बेटे की आपने कभी जाकर रिपोर्ट ही नहीं देखी और लास्ट में कम नंबर क्यों ले आया? तो गलतियां आप माँ-बाप की हैं।

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