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    क्राईम में भी महिलाओं की बराबर भागेदारी

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    ड्रग्स, कत्ल व अन्य अपराधिक मामलों में 90 महिलाएं हैं जिला संगरूर जेल में नजरबंद

    संगरूर (गुरप्रीत सिंह)। पढ़ाई व खेलों के अतिरिक्त प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं, पुरुषों के बराबर पहुंच चुकी हैं। अब यदि अपराधिक गतिविधियों की बात करें तो इसमें भी महिलाओं की चाल धीमी नहीं है। संगरूर जेल में अपराधिक मामलों में लिप्त 90 के करीब महिलाएं नजरबंद हैं, जिन्हें विभिन्न अपराधिक गतिविधियों के कारण जेल में नजरबंद किया गया है।

    जिला संगरूर जेल से मिले अंकड़ों के मुताबिक इस समय संगरूर जेल में 90 के करीब महिलाएं हैं, जिनमें ज्यादातर संख्या सजाजाफता महिलाओं की है, जबकि कुछ हवालाती भी हैं, जिनके मामले अभी अदालत में विचार अधीन हैं। यह भी पता चला है कि सजा पाने वाली महिला कैदियों पर अधिक्तम मामले ड्रग्स से जुड़े हैं। यह महिलाएं ड्रग्स के गैर कानूनी धंधे के कारण सजा काट रही हैं।

    क्षमता से अधिक लोग हैं जेल में बंद

    जिला जेल संगरूर में कैदियों व हवालातियों को रखने की क्षमता 650 है, जबकि इस समय कैदियों व हवालातियों की संख्या 930 है, जो बढ़ती-घटती रहती है। जेल प्रबंधकों मुताबिक फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि संख्या कभी बढ़ जाती है तो कभी कम हो जाती है। जेल में पांच गैंगस्टर भी विभिन्न बैरकों में बंद हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए विशेष जेल कर्मचारी रखे गए हैं।

    अदाकारा अलका व उसका मां भी काट रही हैं सजा

    इन महिलाओं में अलका कौशल अदाकारा व उसकी मां भी शामिल हैं। अलका ने प्रसिद्ध फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ में मश्हूर अदाकारा करीना कपूर की मां का किरदार निभाया था। दोनों मां बेटी पर गांव लांगड़ियां के एक किसान के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का केस है, जिसमें दोनों को दो-दो वर्ष की कैद हुई है। यह दोनों सैलीबे्रटी भी आम कैदियों की तरह जेल की रोटियां खा रही हैं और रहन-सहन भी अन्य महिला कैदियों की तरह ही है।

    नन्हें बालक भी अपनी माताओं के साथ सजा काटने को मजबूर

    वर्णनीय है कि जो महिलाएं जेल में सजा काट रही हैं, उनके साथ दूध पीते छोटे बच्चे भी हैं, जो अपनी मां के साथ मजबूरीवश बेकसूर ही सजा काट रहे हैं। जेल प्रबंधकों द्वारा बेशक इन बच्चों की पढ़ाई और खान-पान का ख्याल रखा जाता है, किन्तु यह बाहरली आजाद फिजा में सांस नहीं ले सकते। यह छोटे बालक भी अपनी माताओं के साथ अपने बचपन का कीमती समय जेल में बिता रहे हैं। ऐसे छोटे बच्चों की संख्या सात है।

    महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। कुछ महिलाओं के साथ छोटे बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई-लिखाई व स्वास्थ्य का विशेष ख्याल यहां रखा जाता है। इन बच्चों का पालन पोषण का माध्यम बाहर न होने के कारण, इनका जेल में ही पूरा ध्यान रखा जाता है।
    -हरदीप सिंह भट्टी जेल सुपरिटेडेंट

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