Param Pita Shah Satnam Ji: पौधे पेड़ बनने से पहले ही साध-संगत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि…

Param Pita Shah Satnam Ji
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सन् 1970 की बात है। ‘शाह मस्ताना शाह सतनाम जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सरसा’ के मुख्य गेट के नजदीक सचखंड हॉल बन चुका था। डेरे के पंडाल में साध-संगत की सुविधा के लिए छोटे-छोटे पौधे लगाए गए थे ताकि बड़े होने पर साध-संगत इनकी छाया के नीचे बैठकर सत्संग सुन सके। एक दिन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज घूमते हुए उधर आ गए, वहां कुछ सेवादार खडे थे। सभी ने पूजनीय सतगुरू जी के सामने नतमस्तक होकर नारा लगाया। पूज्य सतगुरू जी ने सभी सेवादारों को अपना पावन आशीर्वाद दिया व चलते-चलते उनके पास रुक गए। Param Pita Shah Satnam Ji

पूजनीय सतगुरु जी ने सभी का हालचाल पूछा। तब सेवादारों ने पूज्य गुरू जी के चरणों में प्रार्थना की, ‘‘पिता जी! अब तो आनंद आ जाएगा क्योंकि गर्मी के मौसम में साध-संगत को खुले आसमान के नीचे बैठकर सत्संग सुनने में बहुत परेशानी होती थी। जब यह पौधे बड़े पेड़ का रूप धारण कर लेंगे तो समूह साध-संगत उन पेड़ों की छाया नीचे बैठकर सत्संग सुन सकेगी और आराम कर सकेगी’’। यह सुनकर पूजनीय सतगुरू जी ने उस प्रेमी को बहुत ही प्यार से देखा व कुछ रुक कर सर्व-समर्थ सतगुरू जी ने वचन फरमाए,

‘‘भोले! जब तक पौधे पेड़ बनेंगे तब साध-संगत इतनी ज्यादा हो जाएगी कि अपने को सरसा से बाहर टिब्बों (रेत के टीलों) पर जाकर सत्संग करना पडेगा। यह जगह जो ज्यादा लगती है साध-संगत के उठने बैठने व रुकने के काम आएगी।’’ पूज्य सतगुरू जी के पवित्र वचनों अनुसार पेड़ बनने से पहले ही साध-संगत इतनी ज्यादा हो गई थी कि डेरे के अंदर बैठना तक मुश्किल हो गया। आखिर टिब्बों पर जाना ही पड़ा, जहां आज विशाल रूहानी आश्रम ‘शाह सतनाम शाह मस्ताना जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सरसा’ बना हुआ है। Param Pita Shah Satnam Ji