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    प्रेरणास्त्रोत : मृत्यु से साक्षात्कार

    Face-to-death
    Face-to-death

    तीन मित्रों ने मृत्यु का साक्षात्कार करने की इच्छा एक महात्मा के समक्ष रखी महात्मा ने सामने एक गुफा की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘तुम लोग उस गुफा में जाओ। वहाँ मृत्यु से तुम्हारा साक्षात्कार हो जाएगा।’ तीनों तेजी से चलकर गुफा तक पहुँचे। गुफा में झांका तो देखा कि वहाँ तो सोने का ढेर लगा है। उन्होंने एक-दूसरे से कहा, मृत्यु तो यहाँ कहीं नहीं है। उसके बदले तो सोने का ढेर दिखाई दे रहा है। अभी यह सोना अपने-अपने घर ले चलें। बाद में फिर इस गुफा में आकर मृत्यु को ढूँढ़ लेंगे। इस विचार-विमर्श के बाद सोना घर ले जाने पर विचार हुआ। एक ने कहा, तुम दोनों पास के गाँव से रोटी और पानी ले आओ। मैं सोने की रखवाली करता हूँ। दो साथी भोजन और पानी लाने चले। पहला गुफा में ही रहा। थोड़ी देर में एक साथी भोजन लेकर लौटा। गुफा में जैसे ही उसने प्रवेश किया। वहाँ रखवाली के लिए मौजूद साथी ने तलवार से उसकी हत्या कर दी। एक और साथी जब थोड़ी देर बाद पानी लेकर घुसा तो उसने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। दोनों साथियों को ठिकाने लगाने के बाद उसने सोचा कि अब सब कुछ निरापद हो गया। उसने उनका लाया भोजन खाकर सारा सोना अकेले ही घर ले जाने का निर्णय किया। लेकिन भाग्य की विडंबना! रोटी खाते ही उसे चक्कर आया और वह चल बसा। रोटी लाने वाले साथी ने उसमें जहर मिला दिया था। उसने सोचा था कि बाकी दो को जहर मिला खाना खिलाकर खत्म कर दूँगा और संपूर्ण स्वर्ण का मालिक बन जाऊँगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हाँ, तीनों साथियों ने गुफा में मृत्यु के दर्शन जरूर कर लिए।

    कर्म एक साधना

    एक कथा है कि एक खदान में हीरों को खोजने वाला थककर चूर हो चुका था। उसने बहुत कोशिश की पर उसको सफलता नहीं मिली थी। अब उसने आगे श्रम करने का विचार छोड़ दिया। वह बहुत दु:खी होकर अपने साथियों से बोला- ‘‘मैं तो अब इस खोज से बहुत थक चुका हूँ। अब तक मैंने 99999 निन्यानवें हजार सौ निन्यानवें पत्थर को हटाकर देख लिया है, परन्तु अभी तक उनमें एक कण भी हीरे का नहीं मिला।’’ उसके एक साथी ने हँसी में कहा कि एक और पत्थर को खोदकर देखो तो एक लाख की संख्या पूरी हो जाएगी। उसने कहा कि ‘‘अच्छा एक पत्थर और उठाकर देखता हूँ।’’ उसने एक पत्थर और उठाया। उस पत्थर को देखकर वह खुशी से चिल्ला उठा, अरे! ये तो हीरा है। कथा का सार है कि कर्म एक निरंतर साधना है, उसमें संयोंग या अकस्मात के लिए कोई स्थान नहीं है।

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