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    ‘परंपरागत खेती छोड़ फसल विविधीकरण अपनाएं किसान’

    Crop Diversification Sachkahoon

    प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

    नारनौल (सच कहूँ न्यूज)। उपायुक्त श्याम लाल पूनिया ने कहा कि आज के दौर में परंपरागत खेती (Crop Diversification) में मुनाफा नहीं बचा है। किसान फसल विविधीकरण के साथ-साथ बागवानी के क्षेत्र में आएं। सरकार का लक्ष्य है कि किसान बागवानी के साथ जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनें। इसी उद्देश्य के लिए यह केंद्र खोला गया है। उपायुक्त सोमवार को आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एकीकृत बागवानी विकास केंद्र सुंदरह में प्रथम फील्ड एक्सपो-2022 के पहले दिन किसानों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर डीसी ने प्रगतिशील किसानों को पुरस्कृत भी किया। उपायुक्त ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि किसान अपनी फसल का मूल्य संवर्धन करें और मार्केटिंग की तरफ बढ़े। पानी की बचत करने के लिए पर ड्रॉप मोर क्राप के फामूर्ले पर फसल उगाएं। केंद्र पर किसानों को सस्ती दर पर पौध दी जाती है। इसके लिए किसान अपनी पौध की बुकिंग समय से पहले करवाएं। साथ ही किसान अपने गांव में जाकर दूसरे किसानों को भी अपने साथ जोड़ें।

    रेवाड़ी से जिला उद्यान अधिकारी डा. मनदीप यादव ने बताया कि बागवानी फसलों से संबंधित विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना होगा। बागवानी फसलों में 25 से 100 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। बागवानी विभाग द्वारा बम्बू स्टेकिंग, आयरन स्टेकिंग मलचिग, लॉटनल, टिशु कलचर में डेट पाम, मशरूम ट्रे इत्यादि मदों पर भी अनुदान का प्रावधान है। योजनाओं का लाभ उठाने के लिए विभाग की वेबसाइट एचओआरटीहरियाणा स्कीम डॉट इन पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। संरक्षित खेती विशेषज्ञ डॉ. लवलेश ने कहा कि भूमि का जल स्तर दिनोंदिन कम होता जा रहा है, वहीं परंपरागत खेती की वजह से भूमि की उपजाऊ शक्ति में भी पहले से कमी आई है। ऐसे में किसानों के लिए फल एवं सब्जियों की संरक्षित खेती ही एक विकल्प बचता है। यह खेती किसानों की आय में इजाफा करने में भी मददगार साबित होगी। संरक्षित खेती में मुख्य सब्जी खीरा, शिमला मिर्च, रंगीन, टमाटर व बीज रहित बैंगन लगाया जा सकता है। संरक्षित खेती के माध्यम से सब्जी की गुणवता में सुधार व तीन से चार गुणा अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। इससे किसान की आमदनी में भी बढोतरी होगी। पोलिहाउस, नेटहाउस, पोलीनेट व वाक-इन-टनल के माध्यम से संरक्षित खेती की जा सकती है।

    कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ से डा. नरेंद्र सिंह ने सब्जियों की खेती में कीट व रोगों के प्रबंधन के बारे में बताया ताकि फसलों को कीट व रोगों के होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। डा. पूनम यादव ने बताया कि बागवानी फसलों की तुड़ाई के बाद प्रोसेसिग करके (जेम, जैली, विभिन्न तरह के अचार) अधिक मुनाफा लिया जा सकता है। एसडीओ डा. अजय यादव ने कृषि विभाग के विभिन्न स्कीमों की जानकारी देकर लाभ उठाने को कहा। इसके साथ ही मत्स्य अधिकारी शिवकुमार ने भी मत्स्य से संबंधित विभिन्न स्कीमों के महत्व के बारे में जानकारी दी। समापन समारोह में अटेली के विधायक सीताराम यादव मुख्य अतिथि होंगे।

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