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    खेती संकट में, संघर्ष के लिए तैयार रहें: चौ. नरेश टिकैत

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    Haridwar News: खेती संकट में, संघर्ष के लिए तैयार रहें: चौ. नरेश टिकैत

    अब समय आ गया है कि ग्राम इकाई स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए:चौ.राकेश टिकैत

    • भाकियू के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में देशभर से जुटे किसान नेता, सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार
    • हरिद्वार में गरजे किसानों ने केंद्र सरकार को सौंपा 8 सूत्रीय ज्ञापन

    हरिद्वार (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Haridwar News: “देश की खेती आज सबसे बड़े संकट से गुजर रही है, और किसान अपने ही देश में अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है।” यह बात भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने हरिद्वार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के दूसरे दिन कही। उन्होंने कहा कि फसलों के उचित मूल्य न मिलने और नीतिगत असंतुलन के कारण किसान कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा है। Haridwar News

    शिविर के दौरान भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अब समय आ गया है कि ग्राम इकाई स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए, ताकि हर गांव, हर खेत से आंदोलन को ताकत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि “आने वाला समय संघर्ष का है। हमें एकजुट होकर सरकार की किसान विरोधी नीतियों का मुकाबला करना होगा।”

    एमएसपी गारंटी, कर्जमाफी, जीएसटी मुक्त खेती और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे उठाए | Haridwar News

    राष्ट्रीय चिंतन शिविर में देशभर से आए किसान नेताओं ने एक स्वर में केंद्र सरकार की कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए, प्रधानमंत्री के नाम 8 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी हरिद्वार के माध्यम से सौंपा। इसमें गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल, किसानों की सम्पूर्ण ऋणमाफी, एमएसपी पर कानून, जीएसटी व एनजीटी से खेती की मुक्ति, विद्युत और संस्थाओं के निजीकरण पर रोक, जीएम बीजों पर प्रतिबंध, भूमि अधिग्रहण पर पारदर्शी नीति, और नई कृषि मार्केटिंग नीति की वापसी की मांग शामिल है।

    कृषि को ‘आत्मा’ कहा, लेकिन नीतियां ‘विरोधाभासी’: युद्धवीर सिंह

    चिंतन शिविर के मंच से राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने सरकार की कथनी और करनी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि, “सरकार कृषि को ‘रीढ़’ तो कहती है, लेकिन नीतियां किसानों की रीढ़ तोड़ने वाली हैं। हमें जागरूक और संगठित होकर जवाब देना होगा।

    “इस दौरान राज्य व राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा, दिल्ली अध्यक्ष दलजीत सिंह डागर, युवा प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मंच पर मौजूद रहे। Haridwar News

    “सरकार को बदलनी होगी सोच, वरना किसान करेगा फैसला”: भाकियू

    भाकियू नेताओं ने साफ किया कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो पूरे देश में नए आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाएगी। वक्ताओं ने चेताया कि सरकार कॉरपोरेट के दबाव में नीति निर्माण बंद करे और खेती-किसानी को संवेदनशील विषय माने। वही शिविर में ज्ञानी जैल सिंह के पौत्र इंद्रजीत सिंह रामगढ़िया भी विश्वकर्मा समाज के साथ भाकियू में शामिल हुए।

    किसानों ने कहा,”जल, जंगल, जमीन” के बिना न प्रकृति का अस्तित्व है, न किसान का। जीएम बीजों और नई कृषि नीति को देश के लिए खतरा करार दिया गया। हरिद्वार में यह राष्ट्रीय चिंतन शिविर अब केवल एक बैठक नहीं, बल्कि कृषि नीति के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बनकर उभरा है। भाकियू ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में कृषि आधारित आंदोलन को नई दिशा और धार दी जाएगी। Haridwar News

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