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Sunday, March 1, 2026
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    मेहनत के आगे ढेर हुई गरीबी: पिता चलाते थे घोड़ा-गाड़ी, बेटी ने की भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी

    RaniRampal

    रानी के पिता बोले, मैच बेशक हारे लेकिल दिल जीता

    सच कहूँ, देवीलाल बारना
    कुरुक्षेत्र। कहते हैं जब व्यक्ति मेहनत व लग्न के साथ आगे बढता है तो गरीबी या अन्य अड़चनें अपने आप रास्ता छोड़ देती हैं। ऐसी ही सक्सेस स्टोरी भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल की भी है। रानी अपने पिता रामपाल का नाम अपने नाम के साथ जोड़ती हैं। रानी रामपाल कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद की निवासी हैं। शुक्रवार को कांस्य के लिए भारतीय टीम ने मैच खेला। मैच में बेशक भारतीय हॉकी टीम न जीत सकी हो, लेकिन देश का दिल हॉकी टीम ने जरूर जीत लिया है।

    पिता को दिया आश्वासन तो मिली हॉकी खेलने की इजाजत

    रानी रामपाल के पिता घोड़ा-रेहड़ी चलाकर अपने परिवार का पेट पालते थे। ऐसे में बच्चों पर एक पिता कितना खर्च कर सकता है यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। रानी जब 7 वर्ष की थी तो पिता के सामने हॉकी खेलने की बात कही। पिता व परिवार ने एकदम ना कर दिया। काफी दिनों के बाद बेटी की जिद्द के आगे पिता मान गए। इस पर रानी ने विश्वास दिलाया कि आपके विश्वास को टूटने नही दूंगी। तब पिता ने रानी को खेलने की इजाजत दी।

    Rani

    500 ग्राम दूध में 300 ग्राम पानी मिलाकर ले जाती थीं एकेडमी में

    रानी बताती हैं कि उन्होंने बहुत बुरा समय देखा है। हॉकी एकेडमी में रोजाना अपने लिए 500 ग्राम दूध लेकर जाना होता था। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे 200 ग्राम दूध व 300 ग्राम पानी मिलाकर ले जाती थीं। परिवार गरीब था राह में मुश्किलें आना भी लाजमी था। द्रोणाचार्य अवार्डी कोच बलदेव सिंह ने रानी की हर प्रकार से मदद की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते बलदेव सिंह ने ही हॉकी स्टिक, शूज व अन्य चीजें उपलब्ध करवाईं। कई बार उन्होंने हॉकी छोड़ने के बारे में सोचा, क्योंकि उनके परिवार के पास उनकी कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे लेकिन कोच बलदेव सिंह ने और सीनियर खिलाड़ियों ने उनका साथ दिया। उन्हें ट्रेनिंग के लिए हॉकी की पुरानी किट मुहैया कराई।

    जो लोग तंज कसते थे आज वे अपने बच्चों को हॉकी खिला रहे : रामपाल

    रानी के पिता रामपाल कहते हैं कि जब उसकी बेटी हॉकी खेलते जाती थीं तो काफी लोग तंज कसते थे लेकिन मै आज यह सोच कर संतुष्त हूँ कि आज वे अपने बच्चों को हॉकी खिला रहे हैं। रामपाल ने कहा कि आज बेटियां बेटों से आगे बढ़कर देश का नाम रोशन करने का कार्य कर रही हैं। इसलिए बेटियों को पढ़ाओ, लिखाओ व खिलाओ ताकि बेटियां आगे बढ़ सकें। रानी रामपाल ने हॉकी के लिए जी तोड़ मेहनत की।

    जून 2009 में उन्होंने रूस में आयोजित चैम्पियन्स चैलेंज टूनार्मेंट खेला। फाइनल मुकाबले में चार गोल किए और इंडिया को जीत दिलाई। उन्हें द् टॉप गोल स्कोरर और द् यंगेस्ट प्लेयर घोषित किया गया। अब तक वें 200 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेल चुकी हैं। उन्होंने साल 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया। एशियाई खेलों में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के चलते उन्हें एशियाई हॉकी महासंघ की आॅल स्टार टीम का हिस्सा बनाया गया। वर्ष 2020 में रानी रामपाल को पदमश्री व खेल रत्न पुरुस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

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