
Rupee Strengthens: नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा बाज़ार में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाए गए एक महत्त्वपूर्ण कदम के बाद सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से सशक्त होकर 93.59 के स्तर पर खुला। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे रुपये से संबंधित अपनी खुली विदेशी मुद्रा स्थिति (ओपन पोज़िशन) को 100 मिलियन डॉलर की सीमा के भीतर रखें, जिससे मुद्रा बाज़ार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके। RBI News
केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों को यह भी स्पष्ट किया है कि दिन समाप्त होने तक उनकी ऑनशोर स्थिति निर्धारित सीमा के भीतर ही रहनी चाहिए। साथ ही सभी वाणिज्यिक बैंकों को 10 अप्रैल तक इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर बाज़ार की परिस्थितियों के अनुरूप आगे अलग-अलग सीमाएँ भी निर्धारित की जा सकती हैं। अनुमान है कि इस प्रकार की खुली विदेशी मुद्रा स्थिति का कुल आकार लगभग 25 अरब डॉलर से 50 अरब डॉलर के बीच हो सकता है।
मार्च माह के दौरान वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव देखा गया था, जिससे रुपया चार प्रतिशत से अधिक कमजोर हुआ। बीते सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भी इसमें गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगभग 94.84 के आसपास पहुँच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की ऊँची कीमतें भारतीय मुद्रा तथा समग्र अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर रही हैं। RBI News
पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनाव की अवधि लंबी होती जा रही है
पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी तनाव की अवधि लंबी होती जा रही है, जिससे ऊर्जा बाज़ार प्रभावित हुआ है। क्षेत्रीय संघर्ष के विस्तार, हूती विद्रोहियों की सक्रियता तथा अमेरिका द्वारा अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में पुनः वृद्धि देखी गई है और ब्रेंट क्रूड का मूल्य लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कुछ समय पहले तक भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत सुदृढ़ स्थिति में थी, जहाँ विकास दर संतोषजनक, महँगाई नियंत्रित तथा घाटे संतुलित थे। किंतु वर्तमान परिस्थितियों में विकास दर में संभावित कमी, महँगाई में वृद्धि तथा राजकोषीय और चालू खाते के घाटे के बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
हालाँकि बाज़ार विशेषज्ञों का मत है कि इन जोखिमों का एक बड़ा भाग पहले ही निवेशकों की अपेक्षाओं में शामिल हो चुका है। निफ्टी का मूल्य-आय अनुपात लगभग 19.9 गुना के स्तर पर है, जिसे संतुलित तो माना जा सकता है, परंतु अत्यधिक आकर्षक नहीं कहा जा सकता। विश्लेषकों के अनुसार केंद्रीय बैंक का हालिया निर्णय निकट भविष्य में रुपये को स्थिरता प्रदान कर सकता है, क्योंकि डॉलर से संबंधित बड़ी पोज़िशनों में कमी आने से मुद्रा को समर्थन मिलने की संभावना है।
इसके बावजूद डॉलर की निरंतर माँग और ऊर्जा-आधारित महँगाई के जोखिम अभी भी रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती, तब तक रुपये की स्थिति पूरी तरह सुदृढ़ होना कठिन रहेगा। RBI News














