जानें, गन्ने की फसल कितने दिन में तैयार होती है | Ganne ki kheti

ganne ki kheti

जी आया बसंत मन भाया बसंत। sugarcane

बसंत की दस्तक पर कुछ किसान भाई गन्ने की खेती कैसे करें (Ganne ki kheti kaise karen) पर विचार कर रहे होंगे। वैसे तो किसान को खेती का सहज बोध होता है। खेती में शारीरिक और मानसिक अनुकूलता दोनों की ही आवश्यकता होती है, आखिर खेती करना आसान नहीं होता। इस लेख को पढ़ कर किसान भाई बेहतर तरीके से गन्ने की खेती कैसे करें  जान पाएंगे। यहां प्रस्तुत बिंदु आपको गन्ने की खेती करने का उचित समाधान दे सकते हैं। sugarcane

  1. गन्ने की विशेषता।
  2. भारत में गन्ना।
  3. गन्ना उगाने का समय।
  4. गन्ने के लिए उपयुक्त मिट्टी।
  5. गन्ने के बीज।
  6. गन्ने की बुवाई।
  7. गन्ने की रोपाई।
  8. गन्ने की सिंचाई एवं खरपतवार का निवारण।
  9. गन्ने में कीटनाशक और उर्वरक।

आइए मनन करें

गन्ने की विशेषता | Ganne ki kheti

आपके जीवन में ठिठुरते शिशिर में गुड़ की मिठास घोलने का काम गुड़ ही करता है। परंतु ये गुड़ किसान भाई की पूरी लगन और मेहनत से करी गई गन्ने की खेती का फल है। गन्ने के रस से ही गुड़ और शक्कर या खांड (खांडसारी ) का निर्माण होता है। गन्ना एक प्रमुख कच्चा माल है जिसका प्रयोग कुटीर उद्योग में किया जाता है। गर्मी में गन्ने का रस बड़ी राहत देता है।

हमारे भारत में मुख्यत सैक्रम बार्बेरी जाती के गन्ने की खेती (ganne ki kheti)  की जाती है। गन्ने की यह जाति गुड़ एवं खांड के लिए उगाई जाती है। 

 भारत में प्रमुख रूप से गन्ने के लिए पांच अनुसंधान केंद्र हैं। इन अनुसंधान केंद्रों में गन्ने की जाति को और उन्नत बनाया जाता है। तथा गन्ने के सार्थक इस्तेमाल करने के उपाय विकसित किए जाते हैं। यह सराहनीय है। 

भारत में गन्ना

गन्ना हमारे भारत देश की एक नकदी फसल है। और गर्व के साथ भारत गन्ने का जन्म स्थान भी माना जाता है। 2021 के वाणिज्यिक वर्ष में भारत में गन्ने की खेती ( ganne ki kheti) से गन्ने की 5000 लाख मिट्रिक टन का उत्पादन हुआ है। और इसके बदौलत पूरे विश्व में भारत चीनी के उत्पादन ही नहीं उपभोग में भी प्रथम स्थान पर रहा है। ब्राजील के बाद भारत गन्ना उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। 

भारतीय राज्यों में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गन्ने की खेती की जाती है। बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश,गुजरात, ओडिशा और तमिलनाडु आदि भी गन्ने की खेती होती है। गन्ना हमारे देश में उगाए जाने वाला बहुवर्षीय फसल है। और इसी वजह से यहीभारत में पांच करोड़ के लगभग किसानों की आय का स्त्रोत है। और इसी वजह से गन्ने की खेती में खेतिहर मजदूर को भी रोजगार उपलब्ध होता है। यानी यह जीविका का प्रमुख स्रोत भी है।

अगर आप भी सोच रहे हैं की भारत में गन्ने की खेती कैसे करें  तो आगे दिए बिंदुओं को ध्यानपूर्वक पढ़िए, शायद आपको उत्तर मिल जाए।

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गन्ना उगाने का समय।

गन्ने की खेती ( ganne ki kheti) वर्ष में दो बार की जाति है।

  •  पहला बसंतकालीन यानी मध्य फरवरी से मध्य मार्च में की जाती है।
  •  दूसरा शरदकालीन यानी मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर में की जाती है।

जलवायु परिवर्तन का गन्ने की फसल पर ज्यादा प्रभाव नहीं देखा गया है। इसलिए गन्ने की खेती (ganne ki kheti) में अनिष्ट होने की सम्भावना कम रेहती है।

गन्ने के लिए उपयुक्त मिट्टी।

गन्ने की खेती कैसे करें

(ganne ki kheti kaise karen) के सवाल का सबसे मुख्य भाग यही है। तो गन्ने की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी और पानी की उपलब्धता या बहुलता का होना श्रेष्ठकर है। गन्ने की फसल की जड़ में पानी का भराव उस फसल को नष्ट कर सकता है इसलिए यह आवश्यक है की जल की निकासी आसानी से हो जाए। इसके लिए मिट्टी का बहुत महत्व है। तो गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी हैं

  • दोमट मिट्टी
  • काली भारी मिट्टी
  • पीली मिट्टी
  • और थोड़ी रेतीली मिट्टी

दक्षिण भारत में पाई जाने वाली लावा मिट्टी में भी गन्ने की खेती की जाती है। पूर्व में सिंधु घाटी सभ्यता के समय में, राजस्थान में पाए गए साक्ष्य से पता चलता है की उस समय में गन्ने की खेती (ganne ki kheti) हुआ करती होगी।

गन्ने के बीज

उन्नत जाति का बीज ही आपको गन्ने की उत्तम पैदावार देगा । गन्ने की खेती कैसे करें (ganne ki kheti kaise karen) यह बीज पर भी निर्भर करता है। गन्ने का बीज ठोस और मोटा होना चाहिए। रोग रहित बीज आपको निश्चित रूप से उन्नत फसल की गारंटी देता है। बीज किसी एसी पौधशाला से लाएं जहां उसे प्रयाप्त पानी और खाद मिला हो। फसल लगाने से पहले बीज को उपचारित अवश्य करवाएं। लगभग 50 से 60 क्विंटल बीज गन्ने की खेती  के लिए आवश्यक रहेंगे। वैसे ये गन्ने की मोटाई पर भी निर्भर करता है।तीन आंख के साढ़े 37 हजार पैंडे प्रति हेक्टेयर और दो आंख वाले 56 हजार पैंडे उपयुक्त होते हैं।

गन्ने की बुवाई।

बसंतकालीन और शारदकालीन गन्ने की खेती के समय और उसका महत्व तो आप जान गए। गन्ने की खेती कैसे करें (ganne ki kheti kaise karen) की कड़ी में बुवाई के बारे में आगे जानते हैं।

गन्ने की बुवाई से पहले खेत की खबर लेना बहुत जरूरी है। गन्ने की खेती करने से पहले खेत को अच्छी तरह जोत लेना चाहिए। खेत समतल हो इस बात का किसान भाई खयाल रखें। ऊबड़ खाबड़ धरा पर गन्ने की खेती मुश्किल होती है। यही वजह है की पहाड़ी इलाके में गन्ने की खेती नहीं की जा सकती। इन चरणों में आप अपना खेत तैयार कर सकते हैं।

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  • जमीन की गुड़ाई थोड़ी गहराई तक होनी चाहिए – मतलब गन्ने की जड़ों को फैलने और पनपने के लिए पर्याप्त जगह का होना बहुत जरूरी है। गुड़ाई करने से पुरानी उगाई फसल के अवशेष भी नहीं बचते। 
  • जुताई के बाद इसमें पुरानी गोबर की खाद डालें।
  •  खाद डालने के बाद पुनः खेत को जोत दीजिए ताकि गोबर की खाद खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए।
  •  इस प्रक्रिया के बाद खेत में अच्छे से पानी का छिड़काव करें। गन्ने की खेती से पूर्व सिंचाई की प्रक्रिया को पलेव कहते हैं। 
  • खेत की ऊपरी सतह के सूखने के बाद गन्ने के खेत लगाने के लिए उसमें पुनः जुताई की जानी चाहिए। आप रोटावेटर का उपयोग इसके लिए करें। 

अब आपके गन्ने की खेती के लिए आपका खेत प्रारंभिक चरण के लिए तैयार है। खेत की भुरभुरी मिट्टी पाटे की सहायता से समतल कर लीजिए। गन्ने की खेती कैसे करें का आधा प्रक्रम पूरा समझिए। क्योंकि खेत यानी जमीन जब फसल के लिए अच्छी तरह से तैयार हो तो परिणाम उत्तम ही होगा। अपने समतल किए हुए खेत में अब एन. पी. के. को 12: 32 :16 के अनुपात में लगभग 250 किलो का छिड़काव कर दीजिए। अब आपका खेत रोपाई के लिए तैयार है।

  • गन्ने की रोपाई।Ganne ki kheti

गन्ने की खेती के लिए तैयार पौध पर 100 लीटर पानी में 3 किलो सल्फर WDG का छिड़काव करे। इससे फसल में रोग नहीं पनपेगा और विकास अच्छी तरह होगा। गन्ने की डंडियों को इस तरह लगाएं क्योंकि आंखें नाली की बगल की तरफ रहे। 

गन्ने की खेती के लिए दो प्रकार से रोपाई की विधि का जिक्र मिलता है। 

  1. रिज या फरो विधि– इस विधि में खेत में नालियां खोदी जाति हैं। ये नालियां दो से ढाई फीट की दूरी पर बनानी चाहिए। ध्यान रहे को नालियां इस तरह बनाए की जल का भराव हो पाए। और पानी अधिक भर जाने की स्थिति में उसे खाली करना आसान हो। यानी जल निकासी की व्यवस्था नालियों के दोनों अंतिम छोरों पर होनी चाहिए।
  2. समतल विधि– गन्ने की खेती(ganne ki kheti) के रोपाई में यह एक परंपरागत विधि है। इस विधि को कई किसान भाई भारत में आज भी पसंद करते हैं। इस विधि में दो से ढाई फीट की दूरी पर नालियां खोदी जाति हैं। इसके बाद इसमें गन्ने की तीन आंख वाले टुकड़े डाल दिया जाते हैं। इसके बाद पाटे की सहायता से खेत को समतल कर दिया जाता है।
  3. रोपाई मशीन सीडर कटर प्लांटर के द्वारा भी किसान भाई गन्ना बो सकते हैं।

बासंतकालीन बुवाई में नालियां दो से ढाई एवं शरद कालीन में दो से तीन फीट खोदी जाना उचित माना गया है।  नालियां बनाने कारण 

  • उचित सूर्य की रोशनी
  • अधिक हवा, जिससे गन्ना अधिक होता है।
  • कटाई–छटाई आदि के लिए पर्याप्त स्थान
  • मशीनों के लिए स्थान
  • अंतर्वर्ती फसल के लिए उपयोगी
  • गन्ने की सिंचाई एवं खरपतवार का निवारण।

the price of sugarcane SACHKAHOON

बसंत में गन्ने की खेती के लिए 6 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इसमें से चार बार सिंचाई वर्षा से पहले होती है। बारिश के बाद दो बार और सिंचाई की आवश्यकता होती है। अधिक वर्ष वाले तराई क्षेत्रों में चार बार ही सिंचाई की जाती है। दो या तीन वर्षा से पहले और एक वर्षा के बाद।गन्ने की फसल में खरपतवार की समस्या होती है। 

खरपतवार नियंत्रण प्राकृतिक एवं रसायनिक दोनो ही तरीकों से किया जाता है। प्राकृतिक तरीके में गन्ने के खेत में महीने में एक बार निराई गुड़ाई करनी होती है। यानी फसल के दौरान 3 से 4 बार। इस विधि में खेतिहर मजदूर को भी रोजगार मिलता है।रसायनों से निंदा को नष्ट तो नहीं किया जा सकता परंतु नियंत्रित किया जा सकता है।

रसायनिक खरपतवार नियंत्रण में गन्ने की फसल में रोपाई के बाद एट्राजिन का छिड़काव किया जाता है। इसके बाद बीज अंकुरण के समय 2–4 डी सोडियम साल्ट का छिड़काव होता है। 

गन्ने में कीटनाशक और उर्वरक।

गन्ने की खेती कैसे करें ( ganne ki kheti kaise karen) के मुख्य चरणों में से यह एक है। गन्ने में रोग होने का मुख्य कारण बीज होता है। इसके निराकरण के लिए आप

  • उच्च कोटि के बीजों का प्रयोग करें
  • बीजों को रोग मुक्त कराएं
  • सिर्फ स्वीतकृत किस्म के बीज लें
  • गन्ने की खेती के लिए आठ माह का बीज उपयोग करें

गन्ने के रोग और रोकधाम में कुछ नाम

रोग रोकधाम के लिए 
लाल सड़न रोग कार्बेन्डाजिम 
कंडुआ रोग कार्बेन्डाजिम या कार्बोक्सिन
उकठा रोग कार्बेन्डाजिम
ग्रासी सूट उपचारित बीज
सफेद मक्खी एसिटामिप्रिड या इमिडाक्लोप्रिड 
पाइरिल्ला क्विनालफॉस 25 ई. सी. या मैलाथियान 50 ई. सी.
  • गन्ने की फसल में नमी के कारण फंगस का पनपना आम है। इसके लिए पानी को गन्ने की जड़ में इकट्ठा न होने दें।
  • गन्ने की खेती करते समय बुवाई के पश्चात इसमें फोरेट और गामा Hc 1 का उपयोग करें। आप चाहें तो विडोल का उपयोग भी कर सकते हैं।
  • इसकी लंबाई बढ़ने के लिए शहडोल 1000 या एड्रिन का उपयोग कर सकते हैं।

किसान भाई अपने खेतों में जैविक खाद का इस्तेमाल अधिक से अधिक करें। इससे हम मिट्टी की गुणवत्ता को भी अच्छा बना पाएंगे। यह आगे के समय में रसायनों से बंजर नहीं बनेगी।

गन्ने की खेती (ganne ki kheti) करते समय आपको दीमक का सामना भी करना पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए

  •  फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत धूल (टाटाफेन 0.4 प्रतिशत धूल) 25.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।
  •  आप लिण्डेन 1.3 प्रतिशत धूल 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का भी उपयोग कर सकते हैं।
  •  दीमक से प्रभावित फसल को काट कर अलग जगह पर उसका निपटान कर सकते हैं। 
  • 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर नीम की खली बुवाई से पूर्व डालिए। दीमक नहीं होगी।

ये कीटनाशक आप गन्ने के समीप एक नाली बनाकर उसमें डाल कर प्रयोग लें। बसंतकालीन गन्ने की खेती में अंकुर भेदक फसल को प्रभावित करता है। गर्मियों में इसका अधिक असर रहता है। इसके लिए आप क्लोरोपाइरिफास या  फोरेट का छिड़काव कर सकते हैं। छिड़काव के बाद फसल को ढकना आवश्यक होता है।

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सावधानी– अपने गन्ने के खेत में रसायनिक उर्वरकों का छिड़काव करते समय ganne ki kheti

  •  मुंह को ढक कर रखें।
  • मास्क या मोटा कपड़ा इस्तेमाल कर सकते हैं।
  •  हाथों में दस्ताने पहन कर छिड़काव करें। 
  • गन्ने के खेत में छिड़काव से पहले नमी रखें।
  • उर्वरक का छिड़काव बुवाई के बीस दिन बाद करें।

उर्वरकों में विषेले रसायनिक पदार्थ होते हैं जो मानव शरीर के लिए घातक होते हैं। खेत में नमी रहने से रसायनिक अवशोषण भलीभांति हो जाता है। 

निष्कर्ष ganne ki kheti

इस लेख के बाद आपको गन्ने की खेती कैसे करें(ganne ki kheti kaise karen) का उत्तर मिल गया होगा। गन्ने के उत्पादन के लिए कटिबन्ध एवं उष्ष-आद्र कटिबन्ध क्षेत्र सबसे उत्तम रहते हैं। इसलिए भारत में गन्ना एक प्रमुख फसल है। यह विदेशी मुद्रा प्राप्त करने में सहायक है। इसकी की खेती आठ से दस महीने की होती है। किसान भाई अपनी समझ और बोध और इस लेख में प्रकट विचारों को अवशोषित करें। गन्ने की खेती करके बहुत मुनाफा कमाएं ऐसी हमारी कामना है। धन्यवाद। 

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