नए हलकों में भी चुनावी समीकरण बदलने की कुव्वत रखते हैं गोपाल और गोबिंद कांडा

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Gopal and Gobind Kanda sachkahoon

रंगों में दौड़ती है राष्ट्रवाद और जनसेवा की भावना

सरसा (सच कहूँ न्यूज)। कांडा परिवार राजनीतिक पटल पर कोई नया परिवार नहीं है। सरसा के विधायक, व हलोपा सुप्रीमो गोपाल कांडा और उनके अनुज तारा बाबा कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा के पिता स्व. मुरलीधरकांडा एडवोकेट आरएसएस की स्थापना से ही संगठन से जुड़े हुए हैं। उनकी रंगों में देशभक्ति, गौसेवा और जनसेवा दौड़ती थी और आज यही गुण उनके पुत्रों की रंगों में दौड़ रहे हैं। कांडा बंधु विरासत में मिले गुणों के चलते लोगों के दिलों में बस चुके हैं, लोगों के लिए उनके दरवाजे 24 घंटे खुले रहते हैं और हर किसी के सुख-दुख में साथ देते हैं। यह कांडा परिवार जनसेवा के लिए ही बिना किसी भेदभाव के राजनीति कर रहा है। कांडा बंधुओं में चुनावी समीरण पलटने का अजीब हुनर है यहीं वजह है कि किसी भी नए हलके की राजनीति में उनकी ताकत बढ़ती ही जा रही है।

स्व. मुरलीधर कांडा ने गांव-गांव जाकर जलाई राष्ट्रवाद की अलख

गोपाल कांडा और गोबिंद कांडा के पिता स्व. मुरलीधर कांडा एडवोकेट राष्ट्रवाद और परोपकार की भावना सदा दिल में लेकर चलते थे। उन्होंने वर्ष 1926 में लाहौर से वकालत की पढ़ाई की और सरसा आ गए। उन्होंने सरसा तहसील को अपनी कर्मभूमि बनाया और हजारों स्वयं सेवको को साथ लेकर गांव गांव घर घर जाकर राष्ट्रवाद की अलख जगाई। उनका एक ही सपना था कि युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना पैदा की जाए। इसके साथ उन्होंने गो सेवा का अभियान चलाया। पूरे जिले में एक संगठन खड़ा किया और गायों के संरक्षण के लिए हर प्रकार का संघर्ष किया।

पिता के पद् चिन्हों पर चल रहे गोपाल कांडा

वर्ष 2009 में गोपाल कांडा ने अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए सिरसा विधानसभा क्षेत्र से आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और राजनीति के धुरंधरों को पटखनी देते हुए जीत हासिल की और सरकार में गृहराज्यमंत्री, युवा एवं कल्याण, खेल मंत्री बने। बाद में उन्होंने अपनी ही पार्टी हरियाणा लोकहित पार्टी का गठन किया, वर्ष 2019 में चुनाव जीता और भाजपा सरकार को समर्थन दिया। गोपाल कांडा के लिए चुनाव में राजनीतिक समीकरण तय करने और बिसात बिछाने का काम सदा गोबिंद कांडा के हाथों में रखा, लोग उन्हें राजनीति का चाणक्य कहने लगे। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे किसी भी नए हलके में जाकर चुनावी समीकरणों को उलट-पुलट करने की क्षमता रखते है और ऐसा उन्होंने करके भी दिखाया है।

गोबिंद कांडा ने पहला विस चुनाव 2014 में रानियां क्षेत्र से लड़ा

गोबिंद कांडा ने पहला विधानसभा चुनाव 2014 में रानियां क्षेत्र से लड़ा, जिसमें धुंरधंरों को टक्कर देते हुए 39656 वोट हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहे इस चुनाव में सबसे अहम बात यह थी कि उनकी बिरादरी के उस क्षेत्र में दो हजार से कम ही वोट थे। कांडा परिवार की सबसे ज्यादा खासियत यह है कि जो कहा वह करके दिखाया। लोगों के लिए उनके दरवाजे 24 घंटे खुले रहते हैं लोगों की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं।

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