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    सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी फैसले की अधिसूचना सरकार जल्द करें पुन: लागू: लिंबा

    Indira Sawhney decision sachkahoon

    मांगों को लेकर पिछड़ा वर्ग के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

    • बोले, विपक्षी पार्टियां विधानसभा सत्र में पिछड़ा वर्ग के क्रीमीलेयर संबंधी अति महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाकर बीसी वर्ग को दिलवाए न्याय

    सरसा (सच कहूँ न्यूज)। पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा (रजि.) के पिछड़ा वर्ग अधिकार चेतना अभियान के तहत शनिवार को सरसा की रानियां रोड स्थित कुम्हार धर्मशाला में समस्त पिछड़ा वर्ग की सभा आयोजित हुई है। जिसमें बरवाला हलके से कांग्रेस प्रत्याशी रहे भूपेन्द्र गंगवा बतौर मुख्यातिथि तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. आरसी लिंबा ने बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित हुए। सभा की अध्यक्षता जिला कुम्हार सभा के प्रधान रामप्रताप घोडेला ने की। जबकि मंच संचालन सभा के महासचिव रामेश्वर दास ने किया। वहीं सभा के पश्वात पिछड़ा वर्ग के सभी पदाधिकारियों की ओर से लघु सचिवालय पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधी मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।

    वहीं ज्ञापन लेने के लिए बीडीपीओ रवि कुमार पहुंचे। सभा को पूर्व चैयरमैन अशोक वर्मा, राजकुमार रोहलीवाल, प्रो. केसी कंबोज ने संबोधित किया। इस अवसर पर बुटा सिंह थिंद, रानियां से पार्षद जसवंत सिंह, रघुबीर गोबिंदपुरा, हवा सिंह जांगड़ा, बीर सिंह घोडेला, भागीराम टाक, रामानंद निरानियां, बंसीलाल, रतन गेदर, नरेन्द्र देव आर्य सहित पिछड़ा वर्ग के अनेक लोग, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

    तथ्यों को भ्रमित करने वाली अन्यायपूर्ण अधिसूचना

    मुख्यातिथि भूपेन्द्र गंगवा ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में क्रीमीलेयर को लेकर 17 नवंबर 2021 को जारी अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के 24 अगस्त 2021 के फैसले की अवमानना है तथा तथ्यों को भ्रमित करने वाली अन्यायपूर्ण अधिसूचना है। मुख्य वक्ता प्रो. आरसी लिंबा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हरियाण सरकार 2016 से निरंतर पिछड़ा वर्ग के खिलाफ अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक नीतियां बना रही है। जिसके कारण पिछड़ा वर्ग में असंतोष बढ़ता जा रहा है और अपने अधिकारों हेतू सड़कों पर आने को मजबूर हो रहा है।

    केन्द्र सरकार के क्रीमीलेयर संबंधी नियमों का प्रदेश सरकार कर रही सरेआम उल्लंघन

    प्रो. लिंबा ने आरोप लगाया कि 17 नवंबर 2021 की नई अधिसूचना माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24 अगस्त को रद्द की गई 2016 एवं 2018 की अधिसूचना का ही प्रतिरूप है, जो सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और केन्द्र सरकार के क्रीमीलेयर संबंधी नियमों का सरेआम उल्लंघन है।

    हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

    17 नवंबर की अधिसूचना को पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा एवं यादव कल्याण महासभा रेवाड़ी ने जनहित याचिका द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिस पर 9 दिसंबर 2021 को सुनवाई करते हुए सरकार की ओर से पेश एडीशनल एडवोकेट जनरल को फटकार लगाते हुए कहा कि नई अधिसूचना में खामियां क्यों रखी गई। एडीजे ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि खामियों को जल्दी से जल्दी दूर कर दिया जाएगा। प्रदेशाध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि 17 नवंबर की अधिसूचना को रद्द कर जल्दी से जल्दी सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी फैसले के अनुरूप केन्द्र की तर्ज पर 1995 की अधिसूचना को पुन: लागू करें। अन्यथा पिछड़ा वर्ग जन आंदोलन के लिए मजबूर होगा। उन्होंने विपक्षी पार्टियों से भी अपील की है कि वे 17 दिसंबर को विधानसभा सत्र में पिछड़ा वर्ग की इस अति महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाकर बीसी वर्ग को न्याय दिलवाए।

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