हमसे जुड़े

Follow us

17.2 C
Chandigarh
Thursday, February 5, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय राज्यपाल बनाम...

    राज्यपाल बनाम सरकारी नीतियां

    Governor
    Governor

    केरल विधान सभा में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के साथ देश की संवैधानिक व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। राज्यपाल ने एक बार तो प्रस्ताव पढ़ने से इन्कार कर दिया और फिर मुख्य मंत्री की अपील पर प्रस्ताव पढ़ दिया। राजपाल ने कहा, ‘‘मैं सीएए के खिलाफ प्रस्ताव को पढ़ना नहीं चाहता, मैं इस प्रस्ताव के साथ सहमत नहीं, परंतु मुख्य मंत्री के कहने पर पढ़ रहा हूं’’ यहां बात सीएए के सही या गलत होने की नहीं बल्कि एक संवैधानिक पद के सिद्धांत और मर्यादा की है।

    राज्यपाल द्वारा विधान सभा के सैशन की शुरूआत में भाषण दिया जाता है। यह भाषण सरकार की मंशा के अनुसार ही लिखवाया जाता है और राज्यपाल ने केवल वह पढ़ना ही होता है। इस तरह राज्यपाल का पद केवल संवैधानिक पद है और असली शक्तियों का प्रयोग मंत्रिमंडल ही करता है। कई बार स्थिति और भी अजीबो-गरीब बन जाती है जब एक राज्यपाल दो राज्यों की जिम्मेवारी संभालता है।पंजाब और हरियाणा में भी ऐसा मौका आया जब पंजाब के राज्यपाल का पद भी हरियाणा के राज्यपाल के पास था।

    पंजाब की विधानसभा में राज्यपाल ने कहा कि पंजाब के पास अन्य राज्यों को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा की विधानसभा में राज्यपाल महोदय ने हरियाणा के लिए पंजाब से पानी लेने की मांग पूरजोर तरीके से उठाई।ऐसी हालत में दुविधा वाली बात भी बनती है। कई बार राज्यपाल और सरकार के बीच केरल की तरह टकराव वाले हालात भी बनते रहे हैं। पिछले दिनों में पश्चिमी-बंगाल में भी राज्यपाल और सत्ताधारी तृणमूल के बीच खींचातानी रही। ऐसे हालात पुडुचेरी व दिल्ली में भी देखने को मिले।दरअसल राज्यपाल मंत्रिमंडल के साथ सरकार चलाता है और वह सरकार से अलग नहीं हो सकता है।

    दरअसल राज्यपालों की भी राजनीतिक पृष्ठभूमि होती है, जिस कारण उन पर किसी पार्टी विशेष के हितों के पालन के दोष लगते रहे हैं। इसी कारण कई बार राज्यपाल के पद को ही खत्म करने की बात भी उठती रही है। फिर भी इस पद की अपनी अहमियत है। देश के कानून विशेषज्ञों व राजनीतिज्ञों को इस मसले का हल निकालने के लिए कोई पहल करनी चाहिए, ताकि संविधान की उपयोगिता और गरिमा निर्विवादित बनी रहे।

    Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।