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    Mushroom ki Kheti: मटके में उगाए मशरूम

    Mushroom ki Kheti
    Mushroom ki Kheti: मटके में उगाए मशरूम

    Mushroom ki Kheti: श्रीगंगानगर के कृषि अनुसंधान केंद्र में मशरूम की खेती को लेकर एक नवाचार किया गया है। कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. श्रीकृष्ण बेरवा ने एक नई तकनीक ईजाद करते हुए मिट्टी के घड़ों में मशरूम की खेती करने में सफलता हासिल की है। डॉक्टर बेरवा ने बताया कि वह लंबे समय से इस पर प्रयोग कर रहे थे जो कि सफल रहा है।

    उन्होंने बताया कि इस तकनीक से किचन गार्डनिंग से लेकर व्यवसायिक उत्पादन कर बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। कृषि अनुसंधान केंद्र के जरिए अभी लोगों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, कई लोगों ने इस विधि से खेती शुरू भी कर दी है। मशरूम उत्पादन के बाद पॉलिथिन बैग फैंक दिए जाते थे, जिससे प्रदूषण ही होता था लेकिन मटके में मशरूम की खेती करने से प्रदूषण भी नहीं होता है और बेकार पड़े मटके भी काम में आ जाते है।

    इस तरह की जाती है मशरूम की खेती | Mushroom ki Kheti

    डॉक्टर बेरवा ने बताया कि इस तकनीक में उत्पादन लेने के लिए एक पुराना मटका लेकर उसमें निश्चित दूरी में ड्रिल से 15 से 20 छेद किए जाते हैं इसके बाद दो से ढाई किलो तूड़ी गीली कर इसमें मशरूम का 100 ग्राम बीज मिलाया जाता है इसके बाद इस मिश्रण को मटके में भर दिया जाता है और मटके का मुंह कपड़े या प्लास्टिक से बंद कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि 8 से 10 दिन के बाद मशरूम उगना शुरू हो जाता है और मटके के छेदों से बाहर निकलने लगता है। मशरूम बाहर निकलने के ठीक 3 से 4 दिन बाद यह कटाई के लिए तैयार हो जाता है।

    • मशरूम की खेती के लिए 18 से 30 डिग्री तापमान जरूरी होता है
    • साल में 9 महीने इसका उत्पादन किया जा सकता है।
    • मई जून और जुलाई महीने में गर्मी ज्यादा होने के कारण इसका उत्पादन नहीं हो सकता।

    किसानों को दी जा रही है ट्रेनिंग | Mushroom ki Kheti

    सीनियर रिसर्च फेलो मुकेश सेसमा ने बताया कि किसानों में इस खेती को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि कम लागत में बेहतर मुनाफा देने वाली मशरूम की खेती 10 से 15 दिन में तैयार हो जाती है बकायदा इसके लिए किसानों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस खेती के लिए घर में बने कमरे का भी प्रयोग किया जा सकता है।

    किसानों में दिख रहा है भारी उत्साह

    किसानों और अन्य लोगों का कहना है कि मशरूम की खेती कम समय, कम लागत और कम जगह पर की जा सकती है। ऐसे में वे ट्रेनिंग लेकर मशरूम की खेती करना चाहते हैं। जानकारों के अनुसार जिले में मशरूम की खेती के लिए बाजार में अभी कोई ज्यादा कंप्टीशन भी नहीं है। इसलिए इस समय मशरूम की खेती में बेहतर तरीके से काम करके ज्यादा से ज्यादा लाभ लिया जा सकता है। Mushroom ki Kheti

    बड़े शहरों में रहती है अधिक मांग

    डॉ. बैरवा के अनुसार इस तरह के मशरूम की खेती आसान और सस्ती होती है। दिल्ली, कलकत्ता, मुंबई जैसे बड़े शहरों में इसकी अच्छी मांग रहती है। इसकी सबसे खास बात ये होती है कि इसे सुखाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है। अलग-अलग प्रजाति के लिए अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है, इसलिए यह मशरुम साल भर उगाया जा सकता है।

    -कुलदीप गोयल

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