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Saturday, February 28, 2026
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    गृहणियां बोलीं : इसी तरह सिलेंडर के दाम बढ़ते रहे तो फिर से जलाना पड़ेगा चूल्हा

    Inflation Unemployment

    सच कहूँ/राजू
    ओढां। आम जनता पर महंगाई की मार लगातार पड़ रही है। ऐसे में रसोई गैस के बढ़े दाम कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं। एक तरफ तो सरकार उज्ज्वला योजना के तहत लोगों को बनछटियों वाले चूल्हे को छोड़कर गैस-चूल्हा इस्तेमाल करने की बात कह रही है तो वहीं दूसरी तरफ सिलेंडरों के बढ़ रहे दाम आम आदमी की कमर तोड़ने का कार्य कर रहे हंै। लगातार बढ़ रहे एलपीजी सिलेंडरों के दामों ने गृहणियों का बजट बिगाड़ दिया है। बढ़े दामों की बात करें तो पिछले 15 दिनों के अंतराल में गैस के दामों में 50 रूपये की बढ़ोतरी हुई है।

    पहले 16 अगस्त को दाम 25 रूपये बढ़े थे तो वहीं 1 सितंबर को 25 रूपये की और बढ़ोतरी हो गई। जिसके साथ ही सरसा में अब सिलेंडर के दाम करीब 914 रूपये तक पहुंच गए हैं। इस महंगाई को लेकर गृहणियां सरकार को कोसते हुए दाम कम करने की मांग कर रही है। बढ़े दामों के बाद अब ओढां, कालांवाली, गंगा, चौटाला, बणी व रोड़ी क्षेत्र में 14 किलो 200 ग्राम का गैस सिलेंडर 922 रूपये व 19 किलोग्राम का सिलेंडर 1776 रूपये में मिल रहा है। दाम बढ़ने से पूर्व सिलेंंडर पर 20 रूपये 86 पैसे की सब्सिडी थी, लेकिन अभी अगस्त माह के बाद से किसी को सब्सिडी नहीं मिली है।

    घरेलू सिलेंडर के दाम बढ़ने से रसोई का बजट गड़बड़ाकर रह गया है। समझ नहीं आ रहा कि ये दाम कहां जाकर रूकेंगे। घर में हर माह एक सिलेंडर की खपत होती है। सब्सिडी भी न के बराबर ही है। हर माह सिलेंडर खरीदना दुश्वार साबित हो रहा है। सरकार को चाहिए कि सिलेंडर के दाम कम करें।
    – अंजू गोयल, गृहणी।

    पिछले 15 दिन के अंतराल में सिलेंडर के दाम 2 बार बढ़े हैं। इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि मध्यम वर्गीय परिवार की हालात क्या होगी। जैसे-जैसे सिलेंडर खत्म होता है वैसे-वैसे नए सिलेंडर को लेकर चिंता लग जाती है। अब तो गैस को भी सोच-समझकर बरतना पड़ता है। महंगाई पर कंट्रोल करने के लिए सरकार को उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
    – नीलम रोहिल्ला, गृहणी।

    सिलेंडर के अलावा भी अन्य महंगाई बढ़ती जा रही है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। अब तो तकरीबन हर रोज ही सिलेंडर के दाम बढ़ रहे हैं। इस महंगाई में आम आदमी का वैसे भी जीना दुभर होकर रह गया है। अब तो ये लगता है कि बनछटियों वाला चूल्हा ही ठीक रहेगा।
    – सुमन गोदारा, गृहणी।

    कोरोना काल ने वैसे ही लोगों को काफी प्रभावित किया है और ऊपर से सरकार ने महंगाई बढ़ाकर उनकी परेशानी को दोगुना कर दिया। आज हर घर गैस सिलेंडर पर आश्रित है। अगर इसी तरह दामों में ईजाफा होता रहा तो उन्हें मजबूरन गैस-चूल्हा छोड़कर फिर सामान्य चूल्हे से काम चलाना पड़ेगा।
    सरस्वती, गृहणी।

    सिलेंडर के बढ़ रहे दाम सुनकर मैं आश्चर्यचकित हूं। कुछ समय पहले जो सिलेंडर 650 या 700 रूपये का मिलता था। वही सिलेंडर आज 922 रूपये तक मिल रहा है। ये भी पता नहीं कि इनके दाम और कब बढ़ जाएं। अब तो सिलेंंडर खरीदना दुश्वार होकर रह गया है।
    – माया वर्मा, गृहणी।

    सरकार एक तरफ तो उज्ज्वला योजना के तहत हर घर में सस्ते दामों में गैस सिलेंडर पहुंचाने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाकर लोगों की कमर तोड़ने का कार्य कर रही है। अकेला सिलेंडर ही नहीं अपितु रसोई के हर सामान के रेटों में आग लगी हुई है। घर का खर्च चलाना दुश्वार होता जा रहा है।
    – ममता छापौला, गृहणी।

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