लापरवाही नहीं, जिम्मेदारी समझें
निडरता व लापरवाही में बहुत बड़ा अंतर है। लापरवाही इंसानियत के खिलाफ अपराध है। भले ही भारतीयों की परम्परा ज्यादा घुलने वाली है, इसीलिए देशवासी यदि अपनी सुरक्षा के लिए सरकार के दिशा-निर्देशों की पालना नहीं कर सकते तब यह बात बहुत हानिजनक साबित हो सकती है।
घबराएं नहीं, जागरूक रहें
आज 22 मार्च को केंद्र सरकार ने जनता कर्फ्यू का आह्वान एक वैज्ञानिक सोच से प्रेरित मानवता को समर्पित निर्णय है। पूरा देश इस निर्णय से सहमत है। नि:संदेह इस मुहिम से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश की मिसाल निराशाजनक
सबसे निराशाजनक पहलू यह है कि सरकार किसी मुद्दे पर नहीं गिरी बल्कि पार्टी विधायकों की नीयत गिर गई जो राजनेताओं की स्वार्थी सोच के चलते पर सवाल खड़े कर रही है।
मासूमों पर जुल्म रोका जाए
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष देश भर में 40000 के करीब बच्चे अगवा किये जाते हैं जिनमें से 12000 के करीब मामले अनसुलझे रह जाते हैं।
बैंकिंग सिस्टम में हो ठोस सुधार
आवश्यकता है निजी बैंकों की कार्यप्रणाली की सही निगरानी करने के लिए मजबूत अॅथारटी बनाने की। प्राईवेट बैंक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। एनपीए में सरकारी बैंक भी पीछे नहीं हैं फिर भी निजी बैंकों के प्रबंध को सभ्य बनाने के लिए विशेष जोर देना होगा।
मजबूर लोगों से मुनाफे के नाम पर लूट क्यों
परंतु जब से लोगों ने बैंकों में, सोने में, आलीशान घरों में धन का निवेश करना शुरू किया है, तब से बहुत से लोग इस ताक में रहने लगे हैं कि कब आफत टूटे और वे कमाई करें।
भारत की सराहनीय पहल
भारत की सबसे बड़ी सफलता वायरस से पीड़ित मरीजों की पहचान करना है। केंद्र सहित राज्य सरकारों द्वारा हवाई अड्डों पर विदेशों से लौटे लोगों की निरंतर जांच की जा रही है। इसी तरह कोई जनसभा करना, सिनेमा, जिम, स्विमिंग पुल बंद करवाने के साथ-साथ स्कूलों व कॉलेजों में भी छुट्टियां कर दी गई हैं।
अब नहीं ली तो कब लेंगे सीख?
जब मनुष्य प्राकृति से छेड़छाड़ की हदों को पार करेगा तब प्राकृति का प्रकोप बर्दाश्त करना पड़ता है। प्राचीन ग्रंथ महाविज्ञान हैं जो मनुष्य का न केवल रूहानी नेतृत्व करते हैं बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य का रास्ता भी बताते हैं।
सावधानी ही बड़ा हथियार
इस मामले में प्रत्येक भारतीय को सावधानी के साथ-साथ मानवता के प्रति संवेदनशीलता भी अपनानी चाहिए। जमीनी स्तर पर प्रबंधों की देखरेख के लिए अधिकारियों को जज्बे व जिम्मेदारी से कार्य करने की आवश्यकता है।


























