प्रेरणास्त्रोत : राजा भोज की उदारता
मार्ग में भूख लगने पर जब मैं खाने लगा, तभी एक कुतिया मेरे निकट आकर बैठ गई। स्पष्ट था कि वह भूखी थी। दया भाव से मैंने उसके सामने रोटी फेंक दी, जिसे वह कुतिया चट-पट खा गई।
आंदोलनों की भेंंट चढ़ती सार्वजनिक संपत्ति
आखिर देश का आम नागरिक कब तक आंदोलनों के आगे लाचार होता रहेगा। भले ही बात कितनी भी गंभीर हो पर हिंसा उसका जबाव नहीं हो सकता। हांलाकि 2017 के सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पहुंचाने के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो साफ हो जाता है
प्रेरणास्त्रोत: कर्ण की नैतिकता
दूसरा अनैतिक तरह से विजय प्राप्त करना मेरे संस्कारों में नहीं है।
यदि मैं अर्जुन को हराने में सफलता प्राप्त करूंगा तो नैतिक प्रयत्नों से, अनैतिक तरह से नहीं।


























