लोकतंत्र की मजबूती में प्रेस की भूमिका
वहीं अब दो पायदान और नीचे खिसककर 140वें पायदान पर पहुंच गया है।
निसंदेह प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में यह गिरावट स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
प्रेरणास्रोत : एक अंग्रेज ने कहा
एक दिन महात्मा बुद्ध घने जंगल में होकर कहीं जा रहे थे। दूर से अंगुलिमार ने उन्हें देख लिया। वह आनन-फानन में जा पहुँचा, उनके पास आकर बोला, ‘‘साधु, जो कुछ भी तुम्हारे पास हो, उसे निकाल दो अन्यथा तुम्हारी जान की खैर नहीं।’’
एक विश्व शक्ति के रूप में भारत की कल्पना?
महाशक्ति में परिपक्व राजनीति, सौहार्दपूर्ण समाज, सुदृढ़ अर्थव्यवस्था अैर सुदृढ़ रक्षा ढांचा होता है और ये चारों चीजें मिलकर उस देश को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थिति पर पहुंचाती है और उसका वर्चस्व स्थापित करती है।


























