यह तोड़ने का नहीं देश को जोड़ने का समय
दुर्भाग्य देखिए जिस संविधान पर देश चलता। उसी संविधान ने समता और जीवन जीने की स्वतंत्रता दे रखी, लेकिन रहनुमाई बेरुखी ने तो कइयों श्रमिकों की जान ले ली। कोई भूख से मरा तो कोई सिस्टम के नकारेपन की वजह से।
कोरोना ने विज्ञान को कटघरे में खड़ा किया
हमें गम्भीरता से सोचना चाहिए की आखिर कोरोना का तोड़ क्यों नहीं मिल पा रहा है। यह सब तब हो रहा है जब विश्व में एक से बढ़कर एक नई आधुनिकता वाले उपकरण मौजूद है।