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    आईआईटी रुड़की का बड़ा कदम, छात्रों के फायदे के लिए की ये खास तैयारी

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    आईआईटी रुड़की का बड़ा कदम, छात्रों के फायदे के लिए की ये खास तैयारी

    IIT Roorkee Mental Health Policy: उत्तराखंड। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए Indian Institute of Technology Roorkee ने अपने परिसर के लिए व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। संस्थान का मानना है कि यह कदम न केवल परिसर में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए सहायक सिद्ध होगा, बल्कि अन्य प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है। Roorkee News

    इस नीति का प्रारंभिक प्रारूप संस्थान के वेलनेस सेंटर द्वारा तैयार किया गया है, जो विद्यार्थियों, अध्यापकों और कर्मचारियों को परामर्श एवं मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराता है। मसौदे के निर्माण में छात्र कल्याण अधिष्ठाता, छात्र वेलनेस से जुड़े पदाधिकारी, नैदानिक मनोवैज्ञानिक, बाह्य विशेषज्ञ तथा संकाय सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, ताकि नीति व्यावहारिक अनुभव और शैक्षणिक दृष्टिकोण दोनों पर आधारित हो।

    इस पहल को ‘सहयोग 2.0’ (Sahyog2_0) नामक अंतर-आईआईटी विमर्श कार्यक्रम से भी बल मिला। यह कार्यक्रम पूर्व में आयोजित ‘सहयोग 1.0’ की सफलता का विस्तार है। इसका उद्देश्य विभिन्न आईआईटी संस्थानों में प्रचलित व्यवस्थाओं, अनुभवों और चुनौतियों का अध्ययन कर एक समावेशी एवं प्रभावी नीति का निर्माण करना है। Roorkee News

    यह पहल न्यायपालिका और नियामक संस्थाओं के हालिया निर्देशों के अनुरूप

    कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य नीति की संरचना, उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया, निवारक उपायों की आवश्यकता, आपातकालीन सहायता तंत्र की स्थापना तथा वेलनेस सेंटर और काउंसलिंग इकाइयों की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। संकट की स्थिति में स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित करने और सभी संस्थानों में समान नीति लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    यह पहल न्यायपालिका और नियामक संस्थाओं के हालिया निर्देशों के अनुरूप भी है। Supreme Court of India तथा University Grants Commission द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया है। विमर्श कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें AIIMS Rishikesh, King George’s Medical University तथा Tata Institute of Social Sciences सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थान शामिल रहे।

    संस्थान के निदेशक K. K. Pant ने कहा कि वर्तमान समय में शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इस प्रकार की पहलें संस्थानों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। इस नई नीति के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, सहयोगात्मक और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की अपेक्षा है। Roorkee News