प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार) Pratap Nagar News: बेलगढ़ क्षेत्र में यमुना नदी की पटड़ी को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर जो निर्माण कार्य कराया गया था, वह आज अवैध खनन तस्करों की मनमानी के कारण गंभीर खतरे में पड़ गया है। यमुना नदी के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर जमीन को खोखला किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि आसपास बसे दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है।
स्थानीय ग्रामीण अजमेर सिंह चमन लाल गुरमेज सिंह के अनुसार, खनन माफिया रात-दिन बिना किसी डर के भारी मशीनों एचएम (हाइड्रोलिक मशीन) और जेसीबी के जरिए यमुना नदी के नजदीक 30 से 50 फुट तक गहरे गड्ढे खोद चुके हैं। इस खुदाई से बड़ी मात्रा में चोवा (खनिज/मिट्टी) निकाला गया है। यमुना नदी की पटड़ी के बेहद करीब इस तरह की खुदाई से जमीन की प्राकृतिक मजबूती खत्म होती जा रही है, जिससे किसी भी समय यमुना नदी के कटाव या टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। Pratap Nagar News
अवैध खनन करने से यमुना की पटरी मात्र कुछ मीटर दूर रह गई
इस अवैध खनन का सीधा असर बेलगढ़, नाथनपुर, कन्यावाला, लाकड़, भीलपुरा, कोलीवाला, नवाजपुर सहित कई गांवों पर पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यमुना नदी पहले ही उफान पर रहती है। यदि नदी की पटड़ी कमजोर हुई या कहीं से टूट गई, तो इन गांवों में बाढ़ आना तय माना जा रहा है।
गlसमाज सेवी ज्ञानचंद का कहना है कि खनन के कारण खेतों की जमीन भी धंसने लगी है और कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे पानी से भर चुके हैं, जो हादसों को न्योता दे रहे हैं। यमुना नदी इस अवैध खनन के कारण आबादी की तरफ अपना रुख कर सकती जिससे करीबन एक दर्जन गांव बाढ से प्रभावित होंगे।
ग्रामीणों में भय और आक्रोश | Pratap Nagar News
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार इस अवैध खनन की शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्र के एक निवासी एक किसान ने बताया कि रात में मशीनें चलती हैं, दिन में गड्ढे नजर आते हैं। हम डर के साए में जी रहे हैं। अगर नहर टूट गई तो हमारी फसल, घर और जान सब कुछ खतरे में पड़ जाएगा।
नाथनपुर और कन्यावाला के ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि खनन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि उन्हें न प्रशासन का डर है, न कानून का ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोग विरोध करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते, क्योंकि खनन करने वाले दबंग और प्रभावशाली बताए जाते हैं।
प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
नियमों के अनुसार, अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी जिले के के पांच विभागों पर है, जिनमें खनन विभाग, सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और पंचायत विभाग शामिल हैं। इसके बावजूद इन सभी विभागों की ओर से अब तक कोई सख्त कदम उठाया नहीं गया है। यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी अवैध गतिविधि प्रशासन की नजरों से कैसे बची हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागों की मिलीभगत या लापरवाही के कारण ही खनन माफिया खुलेआम सरकारी जमीन और नहर की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।
पर्यावरण और भविष्य पर असर
अवैध खनन का असर सिर्फ बाढ़ के खतरे तक सीमित नहीं है। इससे पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ रहा है। जमीन के नीचे का जलस्तर प्रभावित हो रहा है, पेड़-पौधों की जड़ें कमजोर हो रही हैं और वन्य जीवों के आवास भी नष्ट हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नहर के आसपास इस तरह की गहरी खुदाई भविष्य में बड़े भू-धंसाव (जमीन धंसने) का कारण बन सकती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बारे इंफोर्समेंट अधिकारी इंस्पेक्टर रोहतास ने कहा कि मैं अभी मौके पर जाकर देखा हूं अगर कहीं क्षेत्र में अवैध खनन पाया गया तो अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। Pratap Nagar News
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