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    भारत-चीन के बिगड़ते संबंध

    India and China

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में लद्दाख के साथ सटी लाईन आफ एक्चुअल कंट्रोल के हालातों का जिस प्रकार से खुलासा किया है, वह बेहद गंभीर है और बाहरी नजर की तस्वीर के बिल्कुल विपरीत है। रक्षा मंत्री द्वारा संसद में दी गई जानकारी से यह स्पष्ट है कि चीन युद्ध की पूरी तैयारी करके बैठा है, चीन ने सैनिकों को बड़ी संख्या में गोला-बारूद सहित तैनात किया हुआ है। हालात ये हैं कि भारत-चीन के अधिकारियों और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की मीटिंग के बाद भी राजनाथ सिंह द्वारा दी गई जानकारी यह दर्शाती है कि बातचीत का कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा। तीन महीनों के तनाव के बाद पहली बार सरकार ने तथ्यों के आधार पर जानकारी दी है।

    केवल जोशीले भाषणों और दावों के साथ ही सीमावर्ती मामलों से निपटा नहीं जा सकता बल्कि इसके लिए तथ्यों, सबूतों पर आधारित जानकारी की आवश्यकता होती है। विपक्षी पार्टियों ने लद्दाख मामले के संबंध में सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। भले ही जोर-शोर से यह कहा जा रहा है कि चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया गया लेकिन चीन द्वारा युद्ध की तैयारी जैसा माहौल कई सवाल खड़े करता है। भारत सरकार के दावों के अनुसार यदि गलवान हमले में चीन का भारी नुक्सान हुआ तो नुक्सान होने के बावजूद और कई पड़ावों की बातचीत के बावजूद चीन विवादित क्षेत्र में अमन-शांति का माहौल क्यों नहीं बना रहा है?

    रक्षा मंत्री के अनुसार चीन अरुणाचल प्रदेश के साथ सटी सीमा पर 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना दावा कर रहा है तो इसका मतलब है कि चीन से निपटने के लिए न केवल युद्ध स्तर की तैयारी की आवश्यकता है बल्कि कूटनीतिक जंग लड़ने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है दूसरी तरफ चीन द्वारा भारतीय नेताओं और उद्योगपतियों की जासूसी करने की चर्चा ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि इन आरोपों में वास्तविक्ता है तो चीन की खतरनाक साजिश से इन्कार नहीं किया जा सकता। चीन अपने पुराने रिकार्ड के अनुसार भारत के साथ दिल से दुश्मनी छोड़ने के लिए तैयार नहीं, केवल बैठकों में शांति की बातें हो रही हैं। सीमा को लेकर सरकार को सावधानी बरतने और हालातों की सही जानकारी देते रहना चाहिए।

     

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