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    भारत को चीन के प्रति मुस्तैद रहना होगा

    War with India

    एक जनवरी 2022 से चीन एक नया भूमि कानून लागू करने जा रहा है, जो उसके सीमावर्ती क्षेत्रों के संरक्षण के लिए तैयार किया गया है। इस कानून के प्रावधान अब तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, इसीलिए इसको लेकर अटकलों का बाजार गरम है। चीन 14 देशों के साथ अपनी 22 हजार किलोमीटर से भी अधिक लंबी सीमा साझा करता है। मंगोलिया व रूस के बाद भारत से ही उसकी सबसे ज्यादा सीमा जुड़ी हुई है और सबसे ज्यादा विवाद भी यहीं है। इसी वजह से नए कानून को भारत के खिलाफ माना जा रहा है और तर्क दिए जा रहे हैं कि नई दिल्ली के साथ चल रहे सीमा-विवाद पर बीजिंग ने एकतरफा कवायद की है।

    चीन के नए कानून को समझने के लिए हमें वर्तमान परिस्थितियों पर नजर डालनी पड़ेगी। उसके पास न केवल हथियाई हुई हमारी जमीन है, बल्कि पाकिस्तान ने 1963 के समझौते के तहत उसे पाक अधिकृत कश्मीर का एक हिस्सा दिया है। यह सब अवैध कब्जे हैं। भारत सीमा पर और इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव ने चीन के दौरे किये तथा कई स्तरों की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच समझौते हुए, जिनमें आपसी भरोसा बढ़ाने की कोशिशों का प्रावधान है तथा सीमा विभाजन को स्पष्ट करने का निर्णय लिया गया था। उस समय भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया था, लेकिन चीन की ओर से इसका ठीक से पालन नहीं हुआ और उनकी ओर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की लगातार कोशिशें होती रही हैं। पिछले कुछ समय से चीन अपनी बेल्ट-रोड परियोजना को बढ़ा रहा है।

    इसका एक अहम हिस्सा है चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा। नया कानून पूरी तरह से चीन की एकतरफा कार्रवाई है। इस पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट है कि चीन की मंशा अधिक-से-अधिक जमीन कब्जा करने की है। सीमा क्षेत्र में वह लगातार अपना इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है, पर वह यह भी समझ गया है कि भारत की प्रतिक्रिया भी उसकी हरकतों के हिसाब से होगी। इस कानून को नामंजूर कर भारत ने सही कदम उठाया है। हमारी ओर से कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों की चौकसी होती है, पर अब इसका दायरा बढ़ाना होगा, क्योंकि चीन हर जगह अपनी दखल बढ़ाने की कोशिश करेगा। इसलिए भारत को पूरी तरह मुस्तैद रहना पड़ेगा। साथ में यह भी जरूरी है कि सीमा से संबंधित मसलों पर बातचीत भी जारी रहनी चाहिए, ताकि सीमा विभाजन को स्पष्ट किया जा सके। मेरा मानना है कि सेना को चौकस रहना होगा तथा सैटेलाइट के जरिये पूरी सीमा की निगरानी होनी चाहिए।

     

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