India की कूटनीतिक दृढ़ता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। अमेरिका में जिस प्रकार से प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, उससे स्पष्ट है कि भारत अपनी कूटनीति में दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी रहने के कारण रूस और अमेरिका के बीच टकराव चल रहा है। रूस के साथ भारत की घनिष्ठता के बावजूद अमेरिका ने भारत के साथ अपने रिश्ते सुदृढ़ किए हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से अंतर्राष्टÑीय स्तर पर भारत की पकड़ मजबूत हुई है। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में संयुक्त राष्टÑ में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने पर दूरी बनाए रखी, जिससे अमेरिका खफा था। इसके बावजूद अमेरिका भारत के महत्व से परिचित है। India

अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने युद्ध के दौरान रूस से तेल आपूर्ति को भी जारी रखा, जिससे यह सिद्ध हुआ कि भारत किसी भी देश के साथ संबंध बनाने या बनाए रखने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि यह किसी भी अन्य देश के लिए एक संदेश भी है कि भारत किसी भी स्थिति में अपने हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र रवैया रखता है। वर्तमान घटनाचक्र अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी अच्छी खबर है। अमेरिका में एच-1 बी वीजा का नवीनीकरण होगा। प्रधानमंत्री की इस यात्रा की एक और सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अब जनरल इलेक्ट्रिक की सहायक कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस के एफ 414 इंजन का भारत में सह-उत्पादन किया जाएगा और यह स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करेगा। India

यदि अमेरिकी कंपनी भारतीय जमीन पर विमानों का निर्माण बढ़ाती है, तो इससे यहां रोजगार बढ़ेगा व आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा। एक और महत्वपूर्ण समझौता अंतरिक्ष के क्षेत्र में हुआ है। नासा और इसरो इस साल मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग के लिए एक रणनीतिक ढांचा विकसित कर रहे हैं। भारत ने आर्टेमिस समझौते में शामिल होने का निर्णय लिया है। अगले वर्ष दोनों देश मिलकर कोई अंतरिक्ष अभियान को साकार करेंगे। तकनीक के क्षेत्र में भारत में लड़ाकू विमानों के इंजन बनाना भी एक बड़ी उपलब्धि होगी। India

इस यात्रा से विस्तारवादी नीति वाले देशों को यह स्पष्ट संदेश गया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी विचारधारा और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से कायम रखने में सक्षम है। यदि इस यात्रा को को गैर-राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक नजरिये से देखा जाए तो भारत का पलड़ा भारी है। कोई भी ताकतवर देश अब भारत का इस्तेमाल केवल अपने कूटनीतिक हितों के लिए नहीं कर सकता। भारत इस कूटनीतिक लड़ाई में संयम, क्षमता और स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ रहा है। India

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