भारत-ऑस्ट्रेलिया के लिए महत्वपूर्ण है हिंद-प्रशांत

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Indo Pacific Region

हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा एवं विदेश मंत्रियों की बैठक हुई है। दोनों सामुद्रिक पड़ोसी देशों के मंत्रियों के बीच यह बैठक ‘टू प्लस टू’ मंत्री-स्तरीय संवाद व्यवस्था के तहत हुई पहली बातचीत थी। इन बैठकों में कई विषयों पर गंभीर और विस्तृत चर्चा की गयी तथा समूचे क्षेत्र में व्यापार के मुक्त विस्तार, अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन तथा सतत आर्थिक बढ़ोतरी पर जोर दिया गया। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने द्विपक्षीय बहुआयामी रणनीतिक सहभागिता समझौते का भी एक वर्ष पूरा कर लिया है तथा कई मामलों में और स्तरों पर दोनों देशों के बीच सहयोग सघन हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच विभिन्न भू-रणनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दों पर दृष्टिकोणों में भी समानताएं बढ़ती जा रही हैं, जिसे दोनों देशों के लोगों के गहन आपसी जुड़ाव का समर्थन भी प्राप्त है।

कई मसलों पर भारत और ऑस्ट्रेलिया आपसी सहयोग व भागीदारी को संस्थाओं तथा संगठनों के माध्यम से तेजी से बढ़ा रहे हैं। यह बढ़ोतरी द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय स्तरों पर भी हो रही है। एक मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के गहरे हित जुड़े हुए है। इसमें इस क्षेत्र के सभी देशों के लिए आवागमन की स्वतंत्रता और स्थायित्व शामिल हैं। सामान सुरक्षा चुनौतियों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से प्रेरित होकर दोनों देशों ने द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग से जुड़े प्रयासों को तेज कर दिया है। साल 2020 में द्विपक्षीय व्यापार का आकार 24.4 अरब डॉलर आंका गया था, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के पूरक हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, बल्कि इसमें बहुत दूरगामी आर्थिक परिवर्तन भी हो रहे हैं। इस प्रक्रिया में ऑस्ट्रेलिया एक बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में स्थापित है क्योंकि दोनों ही देशों की दृष्टि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समावेशी आर्थिक समन्वय तथा आक्रामक चीन की ओर से मिल रही चुनौती से प्रेरित है।

कृषि व्यवसाय, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, खनन, शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, बिग डाटा और फाइनेंशियल तकनीक आदि कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच वाणिज्य-व्यापार में वृद्धि देखी जा रही है। भारत और ऑस्ट्रेलिया की कोशिश एक सतत दीर्घकालीन आर्थिक संबंध स्थापित करने की है। यह बैठक भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परस्पर राजनीतिक समझ को विस्तार देगी तथा दूरगामी प्रभाव के सहयोग की अतिरिक्त संभावनाओं के द्वार खोलेगी। द्विपक्षीय संबंधों की बेहतरी के साथ दोनों देश इंडोनेशिया, फ्रांस और जापान समेत विभिन्न समान विचार रखने वाले देशों के साथ त्रिपक्षीय सहयोग व्यवस्था बनाने की दिशा में भी अग्रसर हैं। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में हो रहे भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक परिवर्तन भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के लिए यह आवश्यक बना रहे हैं कि वे मानवीय दृष्टि और सिद्धांतों पर आधारित ठोस सहभागिता स्थापित करें।

 

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