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Saturday, February 28, 2026
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    130 फीट गहरे बोरवेल से केवल 8 घंटे में सुरक्षित निकाला मासूम शिवा

    agra-shiva

    सुबह 8 बजे अपने घर के बार खेलते समय गिरा बोरवेल में

    • बच्चे ने रस्सी में फंसाया अपना हाथ,सेना ने निकाला बाहर

    नई दिल्ली (एजेंसी)। आगरा में 130 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 3 साल के बच्चे को 8 घंटे में ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आर्मी को पुराने अनुभव से इस बार काफी मदद मिली। इससे इतने कम समय में ही आॅप्रेशन को पूरा कर लिया गया। पहली बार ऐसा हुआ कि इतने गहरे गड्ढे से बच्चे को रस्सी के सहारे ही बिना नया गड्ढा बनाए बाहर निकालने में सफलता मिल गई। हालांकि इस दौरान गड्ढे के समानांतर एक और गड्ढा खोदा जा रहा था और उससे सुरंग बनाकर निकालने की तैयारी भी की जा रही थी।

    निबोहरा के गांव धरियाई निवासी छोटेलाल का बेटा शिवा सुबह आठ बजे अपने घर के बाहर खेलते समय बोरवेल में गिर गया। जानकारी मिलने पर घर में कोहराम मच गया। जब जिला प्रशासन को जानकारी मिली तो तत्काल एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आर्मी को इसकी सूचना दी गई। जब तक एनडीआरएफ समेत अन्य टीमें वहां पहुंचती जिला प्रशासन ने अपनी तरफ से तैयारियां पूरी कर लीं। गड्ढे के पास आॅक्सीजन सिलेंडर, पाइप लाइन, एम्बुलेंस के साथ ही डाक्टरों की टीम भी पहुंचा दी गई।

    बच्चे ने दिखाया साहस:

    पहले बच्चे को निकालने के लिए कांटा डाला गया जिससे उसका कपड़ा फंसाकर बाहर निकाला जाए। लेकिन दो प्रयास के बाद भी कांटा नहीं फंसा तो रस्सी में फंदा बनाकर बोरवेल में डाला गया। बच्चे ने भी इस दौरान कमाल का साहस दिखाया। अधिकारियों से मिले निर्देश के बाद बच्चे ने फंदे में अपना हाथ फंसा लिया और उसे खींचकर बाहर निकाल लिया गया।

    बोरवेल में गिरे शिवा की पहली तस्वीर
    बोरवेल में गिरे शिवा की पहली तस्वीर

    परिवार वालों ने 15 दिन पहले बोरवेल से पाईप निकालकर दूसरी जगह लगाए, ढकना भूल गए

    जानकारी के अनुसार शिवा (4) पुत्र छोटेलाल ग्राम धरियाई घर के बाहर सुबह खेल रहा था। इसी दौरान वह एकदम से वह खुले बोरवेल में गिर गया। सूचना मिलते ही एसपीआरए अशोक वेंकट के. मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू करवाया गया। वहीं सेना को मदद के लिए बुलाया। ग्रामीणों को बोरवेल से दूर रखा गया, ताकि मिट्टी न गिरे। वहीं राहत एवं बचाव के साथ ही बच्चों को पाइप की मदद से आॅक्सीजन दी जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि 15 दिन पहले ही इस बोरवेल से पाइप निकालकर छोटेलाल के परिजनों ने दूसरे बोरवेल में डाले थे। लेकिन परिवार के लोग इस दौरान बोरवेल के गड्ढे को बंद करना भूल गए।

    परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है
    परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है

    सेना, एनडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी

    सूचना मिलने पर पहुंची सेना की टीम भी मासूम शिवा की जान बचाने के लिए बचाव कार्य में जुट गई है। मासूम को बचाने के लिए बोरवेल के समानांतर करीब 100 फीट की दूरी पर एक गड्ढा खोदा जा रहा है। वहीं समानांतर ही सुरंग बनाने का काम भी जारी है। सेना की टीम दो जेसीबी की सहायता से गड्ढा खोद रही है। सेना घटनास्थल पर कंट्रोल रूम बनाकर बच्चे की पल-पल की गतिविधियां देख रही है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व योगेंद्र कुमार और एसपीआरए पूर्वी के वेंकट अशोक मौके पर मौजूद हैं। साथ ही दोपहर बाद एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई।

    शिवा बोरवेल में जब गिरा, जब वह घर के बाहर खेल रहा था।
    शिवा बोरवेल में जब गिरा, जब वह घर के बाहर खेल रहा था।

    हादसों से नहीं लिया जा रहा कोई सबक

    देशभर में बोरवेल में बच्चों के गिरने की कई घटनाएं घटित हो चुकी हैं। प्रिंस नाम का एक बच्चा जब बोरवेल में गिरा था। उसके बाद देशभर में सख्ती से बोरवेल के गड्ढे बंद करने के लिए प्रशासन को निर्देशित किया गया था। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में प्रिंस की घटना के बाद सबक नहीं लिया। आज भी कई क्षेत्रों में बोरवेल खुले पड़े हैं।

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