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    ठंड में ठिठुर रहे मंदबुद्धि के लिए फरिश्ते बने ‘इन्सां’

    Mentally Retarded sachkahoon

    नहला कर पहनाए गर्म कपड़े, खिलाया भोजन

    सच कहूँ/विजय शर्मा, करनाल। यदि आपको कोई नग्न, अर्धनग्न या फिर फटे-पुराने, मैले-कुचैले बदबूदार लिबास लपेटे मानसिक रूप से विक्षिप्त मंदबुद्धि(Mentally Retarded) सड़क पर भटकता दिख जाए तो आप क्या करेंगे? शायद मुंह फेरते हुए अपने गतंव्य की ओर निकल जाएंगे। समाज और कर्मों की मार झेल ये मंदबुद्धि जमाने के लिए हंसी व उनकी हिकारत भरी नजरों के पात्र बनकर रह गए हैं।

    लेकिन इस कलयुग में भी ऐसे फरिश्तें है जो ‘इन्सां’ बनाकर ‘इंसानियत’ मुहिम के तहत इनकी सार संभाल ही नहीं कर रहे बल्कि इलाज करवाकर उनके परिजनों की तलाश कर सुपुुर्द भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक ओर मंदबुद्धि की संभाल करते हुए जिला करनाल की साध-संगत ने मानवता का परिचय दिया है। शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादारों व डेरा अनुयायियों ने जिला के गांव डबरकी में ठंड में ठिठुर रहे मंदबुद्धि की संभाल की। सेवादार सबसे पहले उसे कंबोपुरा नामचर्चा घर में लेकर आए जिसके बाद उसे नहला कर गर्म कपड़े पहनाए गए और कंबल ओढ़ाकर स्रेह दिया।

    Mentally Retarded sachkahoon

    मंदबुद्धि को ‘अपना आशियाना’ में छोड़ा

    जिम्मेवारों व सेवादारों द्वारा मंदबुद्धि की सार-संभाल उपरांत उसका नाम पता व परिवारिक सदस्यों के बारे जानने का प्रयास किया गया लेकिन वह कुछ भी बताने में असमर्थ था। जिसके बाद जिम्मेवारों द्वारा उसे अपना आशियाना (जुण्डला गेट), करनाल में छोड़ा गया। इस नि:स्वार्थ सेवा कार्य में 15 मैंबर सुरेश इन्सां, ऋषिपाल इन्सां, पप्पी इन्सां (15 मैंबर), कुलदीप इन्सां, मोहित इन्सां सहित अन्य सेवादारों ने अपना सहयोग किया।

    अपनों से भी बढ़कर करते हैं हम सेवा: परविन्द्र इन्सां

    15 मैंबर परविन्द्र इन्सां ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई ‘इंसानियत’ मुहिम के तहत करनाल के सेवादारों ने मंदबुद्धि की सार-संभाल की है। कोई भी मानसिक रूप से विक्षिप्त मंदबुद्धि डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों के संपर्क में आता है तो वे उनकी अपनों से भी बढ़कर तब तक सेवा करते हैं जब तक कि वे पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने व परिजनों बारे जानकारी नहीं दे देते। जानकारी मिलने पर सेवादार खोजबीन कर परिजनों को बुलाकर विक्षिप्त को उनके हवाले कर देते हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है।

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