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Tuesday, March 3, 2026
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    Israel US Iran War: ईरान को लेकर ट्रम्प ने कर दिया बड़ा ऐलान, क्या युद्ध होगा खत्म, जानें सोनिया गांधी ने क्या कहा…

    Israel US Iran War
    Israel US Iran War: ईरान को लेकर ट्रम्प ने कर दिया बड़ा ऐलान, क्या युद्ध होगा खत्म, जानें सोनिया गांधी ने क्या कहा...

    Israel US Iran War: वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका के पास मध्यम और उच्च-मध्यम श्रेणी के हथियार का पर्याप्त भंडार है। राष्ट्रपति ने कहा कि हथियारों के भंडारण के मामले में वह “इतने मजबूत पहले कभी नहीं रहे” और देश के पास हथियारों की “लगभग असीमित आपूर्ति” है। ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि इन भंडारों के सहारे युद्ध “लंबे समय तक” और “सफलतापूर्वक” लड़े जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि ये हथियार अन्य देशों के श्रेष्ठ हथियारों से भी बेहतर हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अत्याधुनिक श्रेणी के हथियारों के मामले में अमेरिका के पास पर्याप्त भंडार है लेकिन “जहां होना चाहिए वहां अभी नहीं है।” उन्होंने कहा कि अतिरिक्त उच्च-स्तरीय हथियार विदेशों में सुरक्षित रखे गये हैं।

    राष्ट्रपति ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूक्रेन को सैकड़ों अरब डॉलर मूल्य के अत्याधुनिक हथियार और संसाधन दिए लेकिन उनकी भरपाई नहीं की। उन्होंने कहा कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण किया था और इसे आगे भी जारी रखेंगे। ट्रम्प ने कहा, “अमेरिका आधुनिक हथियारों से सुसज्जित है और बड़ी जीत के लिए तैयार है।”

    सोनिया गांधी ने खामेनेई के मारे जाने की घटना पर सरकार की चुप्पी को लेकर उठाए सवाल, संसद में चर्चा की रखी मांग

    कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की घटना की निंदा की है और इस मुद्दे पर मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा संसद में चर्चा कराने की मांग की है। श्रीमती गांधी ने एक अखबार में लिखे लेख में कहा है कि सरकार का यह मौन तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है, जिससे भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से संप्रभु समानता, अहस्तक्षेप और शांतिपूर्ण समाधान जैसे सिद्धांतों पर आधारित रही है। चुप्पी इन सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है।

    श्रीमती गांधी ने कहा कि एक मार्च को ईरान ने पुष्टि की थी कि उसके सर्वोच्च नेता की हत्या एक दिन पहले अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हुई। उन्होंने इसे चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच किसी सत्तारूढ़ राष्ट्राध्यक्ष की हत्या बताते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर विघटन करार दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में व्यापक चर्चा की मांग की है।

    श्रीमती गांधी ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या की स्पष्ट निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर कोई ठोस प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरुआती प्रतिक्रिया में अमेरिका इज़रायल के हमलों का उल्लेख किए बिना केवल ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर की गयी जवाबी कार्रवाई की आलोचना की। बाद में उन्होंने सामान्य रूप से चिंता व्यक्त करते हुए संवाद और कूटनीति की बात कही, जबकि हमलों से पहले यही प्रक्रिया जारी थी।

    श्रीमती गांधी ने कहा कि बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के और कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) की भावना के विपरीत है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे कृत्यों पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से सिद्धांत आधारित आपत्ति दर्ज नहीं की जाती, तो अंतरराष्ट्रीय मानकों का क्षरण सामान्य होता जाएगा।

    श्रीमती गांधी ने कहा कि घटना से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़रायल दौरे से लौटे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति समर्थन दोहराया था। उनके अनुसार, वैश्विक दक्षिण के कई देशों और ब्रिक्स साझेदारों द्वारा दूरी बनाए रखने के बीच भारत का यह रुख चिंताजनक है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संकेत जाते हैं।