पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की सीख से इस मुकाम तक पहुँचा: कनिष्क चौहान
गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। जिम्बाब्वे में अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को हराकर मैच के हीरो बने हरियाणा के झज्जर जिला के गांव कुलाना निवासी कनिष्क चौहान को हरियाणवियों ने क्रिकेट का चमकता सितारा बताया। सोमवार को जब वे पैतृक गांव जा रहे थे तो गुरुग्राम जिला के जाटोली गांव में उनका भव्य स्वागत किया गया। एस.एस. क्रिकेट अकादमी में अपने स्वागत से कनिष्क चौहान गद्गद् नजर आए। साथ ही उन्होंने कहा कि क्रिकेट की बारीकियां उसने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से सीखी जिसकी बदौलत मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूं। Kanishk Chauhan
अपनी जादुई गेंदबाजी और तूफानी बल्लेबाजी से अंडर-19 क्रिकेट मैच के फाइनल के अंतिम ओवर में मैच का रुख पलटने वाले कनिष्क के स्वागत में ग्रामीण और क्रिकेट प्रेमी उमड़ पड़े। कनिष्क चौहान ने एस.एस. क्रिकेट अकादमी के खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया। क्रिकेट के अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष महात्र की तूफानी पारी के बाद कनिष्क ने भी अपनी ऑलराउंडर प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने 20 गेंद पर तीन चौके व एक छक्के की मदद से 37 रन बनाए। उन्होंने इंग्लैड टीम के कप्तान थॉमस सहित दो विकेट भी लिए। इससे पूर्व भी सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले उन्होंने पाकिस्तानी टीम को धूल चटाई व मैन ऑफ द मैच रहे।

बचपन से ही क्रिकेट में गहरी रुचि रखने वाले कनिष्क चौहान के अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत का सितारा बनने पर एसएस. क्रिकेट एकेडमी संचालक श्याम चौहान, एमिनेंट पर्सन अभय चौहान, वार्ड पार्षद रवि चौहान, मंडल महामंत्री विजय चौहान, ओमबीर चौहान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा युवा मास्टर सुरेंद्र चौहान, श्रीपाल चौहान, डब्लू चौहान, प्रकाश चौहान, प्रमोद चौहान, सतपाल चौहान, जनक चौहान, अनिल शर्मा, राय सिंह चौहान समेत अनेक ग्रामीणों ने स्वागत करते हुए भविष्य में भी इसी तरह से भारत का नाम रोशन करते रहने का आशीर्वाद दिया।
15 साल की मेहनत से 2024 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चुना गया | Kanishk Chauhan
करीब 15 साल के गहन प्रशिक्षण के बाद कनिष्क चौहान को वर्ष 2024 में पहले अंतर्राष्ट्रीय मैच के लिए चुना गया। उन्होंने भारत की अंडर-19 टीम में जगह बनाई। उनकी पहली वनडे सीरीज इंग्लैंड के खिलाफ थी। इसमें कनिष्क ने पांच वनडे इंटरनेशनल मैच खेलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर का पुरस्कार भी दिलाया। इसी के साथ ही कनिष्क भारतीय क्रिकेट के लिए एक उभरते हुए सितारे बन गये। इंग्लैंड दौरे में सफलता को देखते हुए ही कनिष्क चौहान को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए चुना गया।
उन्होंने चैलेंजर ट्रॉफी और अफगानिस्तान के खिलाफ मैच खेले। उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें अंडर-19 एशिया कप टीम में और बाद में वर्ल्ड कप टीम में चुना गया। कनिष्क द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ दो बार मैन ऑफ द् मैच का खिताब हासिल करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने पर कनिष्क चौहान देश के युवा ऑल राउंडर बनते जा रहे हैं। हरियाणा के गांव कुलाना की धरती से भारत को एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी मिला है।
8 साल की उम्र में शाह सतनाम जी स्टेडियम क्रिकेट एकेडमी में हुआ चयन
बता दें कि कनिष्क चौहान शाह सतनाम जी ब्वॉयज कॉलेज में बीए फाइनल का छात्र है तथा उसने 8 साल की आयु में शाह सतनाम जी स्टेडियम क्रिकेट एकेडमी, सरसा में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। बेहतरीन व एडवांस सुविधाओं वाले इस स्टेडियम में उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। नियमित कोचिंग दी गई। 26 सितंबर 2006 को झज्जर जिले के कुलाना गांव में जन्मे कनिष्क चौहान को क्रिकेट के बेहतरीन तैयारी कराने के लिए वर्ष 2014 में उनका परिवार पैतृक गृह नगर झज्जर से सिरसा शिफ्ट हो गया। कनिष्क चौहान अपने माता-पिता प्रदीप चौहान व सरिता चौहान के इकलौते पुत्र हैं। पिता किसान हैं तो मां गृहिणी के रूप में घर का काम संभालती हैं। Kanishk Chauhan















