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    उपेक्षा का शिकार हो रहा कुरुक्षेत्र का कमल कुंज

    Kurukshetra Kamal Kunj

    तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद द्वारा वर्ष 2000 में किया गया कमल कुंज का उद्घाटन (Kurukshetra Kamal Kunj)

    सच कहूँ, देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र। सन्निहित सरोवर के दक्षिण भाग में दो दशक पूर्व बनाया गया कमल कुंज कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की उपेक्षा के कारण बदहाली का शिकार बना हुआ है। कमल कुंज में चारों ओर सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। कहने को तो कमल के फूल के आकार का बनाया गया यह कमल कुंज पर्यटकों को लुभाने के लिए बनाया गया था लेकिन अब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड इसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। जहां कमल कुंज के पत्थर उखड़े पड़े हैं वहीं इसके बीच में चारों ओर झाड़ियां उग गई हैं। कमल कुंज में पानी की कोई समुचित व्यवस्था नही है। सड़े हुए पानी से दुर्गंध आ रही है।

     कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड नहीं ले रहा कोई सुध

    उल्लेखनीय है कि 29 मार्च 2000 को इस कमल कुंज का उद्घाटन हरियाणा के तत्कालीन महामहिम राज्यपाल महावीर प्रसाद द्वारा किया गया था।उस समय इस कमल कुंज के निर्माण में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला व तत्कालीन परिवहन मंत्री एवं थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा ने गहरी रूचि दिखाई थी। उस वक्त सन्निहित सरोवर की सुंदरता को चार चांद लगाने और पर्यटकों को लुभाने के उद्देश्य से इस कमल कुंज का निर्माण किया गया था।

    केडीबी द्वारा की जा रही उपेक्षा : पवन शास्त्री

    श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के प्रधान पवन शास्त्री से जब इस बारे बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि कमल कुंज की ही नही बल्कि सन्निहित सरोवर की भी केडीबी द्वारा घोर उपेक्षा की जा रही है। बोर्ड केवल मात्र ब्रह्मसरोवर की ओर ही ध्यान देता है जबकि शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण के स्नान का महत्व सन्निहित सरोवर में है। इस सरोवर में स्वच्छ पानी भरने की ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा।

     कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड नहीं ले रहा कोई सुध

    पवन शास्त्री का कहना है कि वर्ष 2000 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन एवं हरियाण के तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद और केंद्रीय मंत्री जगमोहन के प्रयासों से सन्निहित सरोवर को को भव्य रूप देने के उद्देश्य से यह कमल कुंज बनाया गया था। पवन शास्त्री का कहना है कि जब भी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड से इस विषय में बातचीत की जाती है तो बोर्ड के अधिकारी कहते हैं कि सन्निहित सरोवर पर महर्षि दधिची की प्रतिमा लगाने की योजना बन रही है। इसलिए यहां पानी नही भरा जा रहा। अब महर्षि दधिची की प्रतिमा कब लगेगी यह तो समय के गर्भ में है, लेकिन स्वच्छ जल न होने के कारण श्रद्धालुओं की भावना को ठेस पहुंचती है।

    कमल कुंज की सुंदरता को रखा जाए बरकरार : आरडी गोयल

    पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा के सहयोगी रहे आरडी गोयल का कहना है कि गुलजारी लाल नंदा के प्रयासों से 1972 से 1975 तक सन्निहित सरोवर के नवीनीकरण हेतु कार सेवा चलाई गई थी। इससे पहले सन्निहित सरोवर का रूप बड़ा था। उस वक्त पूरे सन्निहित सरोवर में कमल के फूल उगते थे। इसके बाद सन्निहित सरोवर का रूप छोटा कर दिया व जिस स्थान पर आज कमल कुंज है वह जगह खाली छोड़ दी गई थी ताकि बाद में कमल कुंज बनाया जा सके और कमल की महक व सुंदरता पर्यटकों को लुभाती रहे। अब यह तीर्थ उपेक्षा का शिकार है और इसकी सुंदरता को बरकरार रखा जाए।

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