पारंपरिक खेती छोड़ अब आधुनिक खेती की ओर रूझान

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ग्रामीण अंचल की महिलाओं को बना रहे हैं आत्मनिर्भर

जाखल(सच कहूँ/तरसेम सिंह)। क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती की स्थान पर अब उद्यानिकी व फलोद्यान की ओर बढ़ा है, जिससे सुखद परिणाम भी सामने आ रहे हैं। खास कर युवा किसान आधुनिक कृषि के नये तकीनक को समझ कर इसे खेत में इस्तेमाल कर रहे हैं और बंपर पैदावार हासिल कर रहे हैं। यही कारण है कि अब कृषि को भी राज्य में व्यापार के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि किसान आधुनिक तकनीक को अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। खेत व क्यारी को तैयार करने के लिए किसानों को एक बार की मेहनत करनी पड़ती है। इसके बाद हर साल लाखों का मुनाफा होता है।

आमतौर पर क्षेत्र में किसानों द्वारा खरीफ सीजन में धान, मूंग, सोयाबीन और रबी में गेहूं, सरसो चना की फसल की व्यापक खेती ली जाती है। इन फसलों पर 30 प्रतिशत खर्च मांगे बीज खाद और दवाइयों के इस्तेमाल से होता है। इसलिए किसानों को मुनाफा मेहनत और लागत के हिसाब से कम मिलता है। ग्रामीण अंचल के किसानों का रुझान पिछले तीन चार साल से सब्जी तरकारी के साथ मौसमी, पपीते के खेती की ओर बढ़ा है। किसानों द्वारा अब तो सैकड़ों एकड़ में उन्नत खेती की जा रही है। पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक खेती की तो कमाई बढ़ गयी।

प्रगतिशील किसान कश्मीर सिंह व बलवीर सिंह बने मिसाल

गांव चांदपुरा के प्रगतिशील किसान कश्मीर सिंह ग्रेवाल व उनके भाई बलवीर सिंह कई वर्षों से सब्जी उठाकर क्षेत्र में सब्जी को पूरा करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने चांदपुरा में 4 एकड़ में मिर्च, 4 एकड़ में खीरा, 1 एकड़ में वैज्ञानिक विधि से बैंगन व करेला है, 2 एकड़ जमीन में भिंडी, 2 एकड़ में चोला, 1 एकड़ में तरबूज लगाया हुआ है। इसके अलावा 2 एकड़ में नेट सेड के नीचे कई वर्षों से आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं उसमें बेल वाली सब्जी जैसे शिमला मिर्च, कदू, करेला, टमाटर इत्यादि की फसल उगाई हुई है।

30 परिवारों कि महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

गांव चांदपुरा के किसान बलवीर सिंह और कश्मीर सिंह के खेत में 30 परिवारों की महिलाएं सब्जी तोड़ने का कार्य कर अपने घर को अच्छे ढंग से चला रही हैं। या यूं कहें कि आज वह परिवार अपनी गुजर-बसर सही तरीके से कर रहे हैं। कश्मीर सिंह ने बताया कि जो लेबर सब्जी तोड़ने का कार्य करती है वह पूरा वर्ष उनके खेत में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सब्जी तुड़वाई के कार्य में उन्होंने सिर्फ महिलाओं को कार्य दिया हुआ है क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा भी उनके हाथ है आदमी तो कहीं भी काम कर सकता है।

कहां होती है मार्केटिंग

कश्मीर सिंह ने बताया की मार्केटिंग के लिए उनके भतीजे जग्गा सिंह व पुत्र गुरदीप सिंह सब्जी की मार्केटिंग सुनाम (पंजाब) टोहाना, रतिया, जाखल फतेहबाद तक करते हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य में भी उन्होंने छोटे हाथी मालिकों को रोजगार उपलब्ध करवाया हुआ है। उन्होंने बताया कि सन् 1985 में 1 एकड़ का ट्रायल करते हुए सब्जी की खेती शुरू की थी जो आज 10 एकड़ में सब्जी की कास्ट ली जा रही है अगले वर्ष 15 एकड़ में विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई जाएंगी। जिसमें हाइब्रिड क्वालिटी यानी ज्यादा उपज देने वाली सब्जियां उगाई जाती है।

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