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    PM Vishwakarma Yojana: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 41,188 करोड़ रुपए के लोन को मिली मंजूरी

    PM Vishwakarma Yojana

    Vishwakarma Yojana 2025 Update: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के दो वर्ष पूरे होने पर सरकार ने बताया कि इस अवधि में लगभग 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों ने पंजीकरण कराया है। अब तक 4.7 लाख से अधिक ऋणों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी कुल राशि 41,000 करोड़ रुपए से अधिक है। PM Vishwakarma Yojana

    सरकार के अनुसार, लगभग 26 लाख पंजीकृत कारीगरों ने कौशल सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इनमें से 86 प्रतिशत लोगों ने अपनी मूलभूत प्रशिक्षण भी संपन्न कर लिया है। इस योजना में राजमिस्त्री वर्ग का सबसे अधिक पंजीकरण हुआ है। इस पहल के अंतर्गत 23 लाख से अधिक ई-वाउचर जारी किए गए हैं, ताकि पारंपरिक कारीगरों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें और उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा सके।

    योजना की शुरुआत और उद्देश्य

    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का शुभारंभ 17 सितंबर, 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर किया गया था। इसका कुल वित्तीय प्रावधान 13,000 करोड़ रुपए (वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक) रखा गया है। योजना का उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों को उनके व्यवसाय में संपूर्ण सहयोग प्रदान करना है। इसमें महिला सशक्तिकरण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर तथा पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    जिला स्तर पर व्यवस्था | PM Vishwakarma Yojana

    योजना की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए लगभग सभी जिलों में जिला परियोजना प्रबंधन इकाइयाँ (डीपीएमयू) स्थापित की गई हैं। जुलाई 2025 तक इनकी संख्या 497 तक पहुँच चुकी है, जो 618 जिलों को कवर कर रही हैं। डीपीएमयू का कार्य प्रशिक्षण तिथियों, केंद्रों के स्थान, प्रशिक्षण दिशानिर्देशों और लाभार्थियों को समय-समय पर जानकारी उपलब्ध कराना है।

    यह योजना कारीगरों और शिल्पकारों को मान्यता, कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक औज़ार, संपार्श्विक-मुक्त ऋण और डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है। साथ ही ब्रांड प्रचार और विपणन के माध्यम से इनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने का प्रयास करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल छोटे कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे भारतीय पारंपरिक कला और शिल्प को वैश्विक पहचान भी मिल रही है। PM Vishwakarma Yojana