योग से बनाएं अपने शरीर को मजबूत और लचीला

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Yoga

जीवन में स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करना बहुत आवश्यक होता है। मानव शरीर प्रकृति की एक सुन्दर और परिपूर्ण रचना है। यह शरीर जितना चलता-फिरता रहता है, उतना ही स्वस्थ, मजबूत और लचीला बना रहता है। इसीलिए आजकल जिम जाने का फैशन बढ़ता जा रहा है। वहाँ जाकर लोग वर्कआउट करते हैं। बहुत-सा धन देकर वे स्वयं के लिए प्रवेश पाते हैं। लड़की हो या लड़का यानी हर युवा जिम में जाकर अपनी बॉडी बनाकर फिट रहना चाहता है। व्यायाम की रूपरेखा इंसान के स्वास्थ्य, जीवनपद्धति, व्यवसाय और आयु को ध्यान में रख कर निश्चित करनी चाहिए। किसी एक इंसान द्वारा किया जाने वाला व्यायाम दूसरे व्यक्ति को भी सूट कर जाएगा, यह आवश्यक नहीं है। कुछ युवा लोग सीडी चलाकर उसके साथ एक्सरसाइज करते हैं।

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इनके अतिरिक्त कुछ लोग सैर करना स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक मानते हैं। कुछ लोग भागकर, वेट ट्रेनिंग लेकर, स्विमिंग करके, कोई खेल खेलकर या डांस करके द्वारा व्यायाम करते हैं। तरीका कोई भी अपनाया जा सकता है। वास्तव में व्यायाम एक ऐसी गतिविधि है जो मनुष्य के शरीर को स्वस्थ रखती है और साथ ही उसके समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ाती है। माँसपेशियों को मजबूत बनाने, हृदय प्रणाली को सुदृृढ़ करने, एथलेटिक कौशल बढाने, वजन घटाने या फिर केवल मात्र आनन्द आदि किसी भी कारणवश इसे किया जा सकता है। कारण कोई भी हो सकता है, पर उद्देश्य एक ही है कि शरीर स्वस्थ रहना चाहिए, निरोग रहना चाहिए।

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दौड़ना भी एक व्यायाम

प्रतिदिन दौड़ लगाना भी एक व्यायाम है। दौड़ने से शरीर में बदलाव होते हैं। तनाव से दूर रहने में भी मदद मिलती है। शरीर में जमी वसा नष्ट होती है। इस कारण मोटापा घटाने में मदद मिलती है। इससे अच्छी नींद आती है, इन्सान प्रसन्न रहता है। तनाव से दूर रहने में भी मदद मिलती है और सकारात्मक मानसिकता तैयार होती है। मनुष्य दिन भर फ्रेश रहता है और उसे थकावट नहीं होती। नियमित रूप से दौड़ने से स्ट्रोक, रक्तचाप, डायबिटीज जैसी बीमारियों से दूर रहना संभव होता है।

शरीर के लिए लाभकारी आसन- कटिविकासन

इसे सूक्ष्म आसन कहते हैं। शरीर को गर्म करने के लिए करते हैं ताकि आसनों को शुरू करने से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़े। यह वैसे ही है जैसे व्यायाम शुरू करने से पहले वार्मअप करते हैं। इसमें जोड़ोंं का मूवमेंट, सिर, हाथ, पैरों, कमर को घुमाना आदि होता है।

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वज्रासन

जिन्होंने अब तक योग नहीं किया है वे वज्रासन से शुरू कर सकते हैं। वज्रासन खाने से पहले या खाने के बाद 10 मिनट कर सकते हैं। यह पेट को ठीक रखने के साथ ही घुटनों के लिए अच्छा है। मानसिक और शारीरिक फुर्ती बढ़ाता है। वज्रासन ध्यान के लिए भी अच्छा होता है।

जानुशीर्षासन

जानु का अर्थ घुटने और शीर्ष का मतलब सिर होता है। इस आसन को करने से घुटने से लेकर सिर तक स्वस्थ रहता है। मानसिक तनाव दूर होता है। इसे अपनी क्षमता अनुसार करें या फिर 4-5 बार दोहरा सकते हैं। इससे शरीर लचीला बनता है।

तितली आसन

इसमें शरीर का हर हिस्सा लचीला बनता है। रोग प्रतिरोधकता बढ़ती है। जोड़ों के दर्द में आराम देता है। पैरों की थकान दूरी होती है। मानसिक मजबूती मिलती है। यह आसन महिलाओं के लिए लाभकारी है। पीरियड्स या गर्भ संबंधी परेशानी में इससे राहत मिलती है।

पश्चिमोत्तानासन

इसमें पश्चिम का अर्थ पीछे और उत्तान का मतलब उस हिस्से को तानना है। इसमें रीढ़ की हड्डी को तानते हैं। मेरुदंड लचीला होता है। शरीर का हर हिस्सा मजबूत होता है। चेहरे पर तेज आता व हाइट बढ़ती है। पथरी और तनाव में लाभ मिलेगा।

पद्मासन

इसमें शरीर को कमल के आकार की तरह करना होता है। यह कुंडलिनी जागृति करता है जिससे बीमारियां नहीं होती हैं। जिनको घुटनों में दर्द या साइटिका की समस्या है उन्हें लाभ मिलता है। इससे टखने के जोड़ों में लचीलापन आता है। हड्डियां मजबूत होती हैं।

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