नए गुरुग्राम की टूटी सड़कों पर मेहरबानी, पुराने की बेकद्री

  • शहर में बरसाती पानी निकासी के दावे हुए खोखले साबित

  • गहरे गड्ढे होने के बाद भी नहीं हो रहा सुधार

  • नगर निगम के क्षेत्र में सड़कों का हो गया है बुरा हाल

गुरुग्राम। (सच कहूँ/संजय मेहरा) बरसात में ही नहीं, बल्कि बरसात से पहले लंबे समय से पुराने गुरुग्राम में टूटी पड़ी सड़कों की कोई सुध नहीं ली जा रही, लेकिन नए गुरुग्राम में बरसात से ही टूटी सड़कों को बनाने में पूरी शिद्दत से काम कर रहा है। अधिकारियों की यह कार्यशैली बताती है कि उसकी नजर में पुराने गुरुग्राम की क्या अहमियत है और नए की क्या। गुरुग्राम की मुख्य सड़कें तो गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के पास हैं, जबकि छोटी सड़कों की रखरखाव नगर निगम गुरुग्राम करता है। पुराने गुरुग्राम की कई सड़कें तो पिछले दो साल से भी अधिक समय से टूटी पड़ी हैं। किसी सड़क के किनारे गहरे गड्ढे हैं उदाहरण के तौर पर हम गुरुग्राम-पटौदी रोड को ही ले लेते हैं। सेक्टर-10 चौक से आगे बढ़ते ही इस सड़क पर चलता दुभर हो जाता है।

सेक्टर-10 चौक से गाड़ौली गांव पार करने तक सड़क के गहरे गड्ढे उस विकास की पोल खोलते हैं, जो कागजों में या सरकार के समक्ष मौखिक रूप से दिखाया, बताया जा रहा है। धरातल पर जाकर शायद ही कोई अधिकारी अपने क्षेत्र में समस्याओं को देखता हो। सवाल उठता है कि नए गुरुग्राम में बरसात के बीच भी टूटी सड़कों को लगातार बनाया जा रहा है, लेकिन पुराने गुरुग्राम की सड़कों की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता। इसलिए अधिकारियों में कोई डर नहीं है। वे यहां की समस्याओं का समाधान करें या ना करें, कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर फर्क पड़ता, अगर डर होता तो वे अब तक पुराने गुरुग्राम के सोहना अड्डा, सिद्धेश्वर चौक, एमजी रोड बिजली निगम के पास गहरी खाई बनती जा रही सड़क, शीतला माता रोड, सेक्टर-9 समेत तमाम टूटी सड़कों को दुरुस्त कर दिया होता। आम नागरिकों की यही मांग है कि अधिकारियों की इस कार्यशैली पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल तुरंत कड़ा संज्ञान लें। अधिकारियों से पूछा जाए कि आखिर दो-दो साल से सड़कों में गड्ढे क्यों हैं।

नगर निगम में शामिल हुए गांव बदहाल

ब्लॉक समिति के सदस्य जयभगवान सैनी के अलावा ग्रामीण राजेंद्र भारद्वाज, बालकिशन, विनोद कुमार का कहना है कि गांवों को लगातार नगर निगमों में शामिल किया जा रहा है, लेकिन वहां की समस्याओं की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। नगर निगम में शामिल किए गए गावों की हालत बहुत बुरी हो चुकी है। सड़कें तो बनाई ही नहीं जा रही। ग्रामीणों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल जब भी गुरुग्राम आएं तो वे शहर का दौरा जरूर करें। शहर के भीतर व बाहर की तरफ जाने वाली सड़कों की हालत देखकर उन्हें पता लग जाएगा कि यहां पर अधिकारी कैसा काम कर रहे हैं।

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