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    एआईएफ स्कीम तहत 10 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए: जौड़ामाजरा

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    तीन जिलों ने एक हजार आवेदनों के आंकड़े को किया पार

    तीन जिलों ने एक हजार आवेदनों के आंकड़े को किया पार

    • 18 सितम्बर तक कुल 10,509 आवेदन प्राप्त हुए | Chandigarh News

    चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों के कृषि बुनियादी ढांचा फंड (ए.आई.एफ) स्कीम की ओर निरंतर बढ़ रहे रुझान ने एक बार फिर पंजाबियों की उद्यमी भावना को प्रदर्शित किया है। कृषि उपज के बाद के प्रबंधन सम्बन्धी प्रोजेक्टों और साझा कृषि सम्पतियां स्थापित करने के लिए लाभप्रद इस स्कीम के अधीन अब तक राज्य सरकार को दस हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। Chandigarh News

    स्कीम सम्बन्धी ताजा आंकड़े साझा करते हुए पंजाब के बागबानी मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार को 18 सितम्बर तक कुल 10,509 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6042 आवेदनों को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है जबकि 5166 आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने इस स्कीम के अंतर्गत मंजूर हुए आवेदनों के मामले में दूसरा स्थान हासिल किया है। उल्लेखनीय है कि स्कीम के अंतर्गत तीन जिलों ने एक हजार आवेदनों के आंकड़े को पार किया है, जिनमें बठिंडा 1286 आवेदनों, फाजिÞल्का 1158 आवेदनों और पटियाला 1087 आवेदनों के साथ अग्रणी चल रहे हैं।

    बागबानी मंत्री ने बताया कि ए.आई.एफ स्कीम के अंतर्गत पात्र गतिविधियों के लिए दो करोड़ रुपए तक के मियादी कर्जे पर तीन प्रतिशत ब्याज सहायता दी जाती है जबकि ब्याज दर की सीमा नौ प्रतिशत निश्चित की गई है। इस सहायता का लाभ सात सालों तक लिया जा सकता है और हर लाभार्थी विभिन्न स्थानों पर अधिक से अधिक 25 प्रोजेक्ट स्थापित कर सकता है। Chandigarh News

    जौड़ामाजरा ने बताया कि पात्र प्रोजेक्टों के अंतर्गत भंडारण बुनियादी ढांचा (जैसे गोदाम, साईलोज, कोल्ड स्टोर, कोल्ड रुम आदि), प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर (जैसे आटा चक्की, दाल मिल, तेल निकालने वाली यूनिट, राइस शेलर, मसाला प्रोसेसिंग, गुड़ बनाने आदि), छटाई एंड ग्रेडिंग यूनिट, पैकहाउस, राइपनिंग चेंबर, कृषि यंत्र (न्यूनतम 4 यंत्र), कम्बाइन हारवैस्टर, बूम स्प्रेयर, बेलर, रुई पिंजाई, शहद प्रोसेसिंग, रेशम प्रोसेसिंग, नरसरियाँ, बीज प्रोसेसिंग, केंचुआ खाद और कम्परैसड बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान समूहों द्वारा मशरुम फार्मिंग, ऐरोपोनिक्स, हाईड्रोपौनिक्स, पोलीहाऊस, ग्रीनहाउस आदि जैसे प्रोजेक्ट भी स्थापित किए जा सकते हैं। Chandigarh News

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