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Monday, April 6, 2026
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    लेकर कहां कुछ वापिस जाना, ये शरीर भी दान है…

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    नाजर सिंह इन्सां बने ब्लाक सुनाम के 20वें शरीरदानी

    • रामदास ने हरी झंडी दिखाकर एम्बुलैंस को किया रवाना

    सच कहूँ/कर्म थिन्द
    सुनाम उधम सिंह वाला। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते गतदिवस सुनाम ब्लॉक के गांव चट्ठा ननहेड़ा के एक डेरा श्रद्धालु के मरणोंपरांत उसकी तरफ से किए गए प्रण को पूरा करते उसके पारिवारिक सदस्यों ने मृत देह को मैडीकल रिसर्च के लिए दान कर दिया। ब्लॉक भंगीदास छहबर सिंह इन्सां और पंद्रह मैंबर गगनदीप सिंह इन्सां ने बताया कि प्रेमी नाजर सिंह इन्सां (85) निवासी गाँव चट्ठा ननहेड़ा अपनी स्वासों रूपी पूँजी पूरी करके कुल मालिक के चरणों में जा बिराजे हैं।

    प्रेमी नाजर सिंह इन्सां डेरा सच्चा सौदा के अथक सेवादार रहे हैं और उनका समूह परिवार बढ़चढ़ कर मानवता भलाई के कार्यों में हर समय आगे रहता है। उनके मरणोंपरांत उन के पुत्र हरी सिंह इन्सां, बीरबल सिंह इन्सां, रामां सिंह इन्सां, बालू सिंह इन्सां, सुखदेव सिंह इन्सां, जसवंत सिंह इन्सां और अन्य पारिवारिक सदस्यों ने उनकी अंतिम इच्छा अनुसार मृत देह को अनक्रियायट आयुर्वैदिक मैडीकल कॉलेज और अस्पताल लखनऊ (उत्तर प्रदेश) को मैडीकल रिसर्च के लिए दान कर दिया।

    इस मौके बाबा रामदास जी मुख्य सेवादार (डेरा बाबा रोटी राम) ने पहुँचकर परिवार के साथ दुख सांझा किया और बाबा रामदास जी की ओर से एम्बूलैंस को हरी झंडी देकर रवाना किया गया। इस समय उनके पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि प्रेमी नाजर सिंह इन्सां हमेशा पूजनीय गुरू जी की शिक्षाओं पर चलते मानवता की सेवा में आगे रहते थे। इस मौके गुरदीप सिंह इन्सां, दर्शन सिंह इन्सां, सतनाम इन्सां, गुरलाल इन्सां भंगीदास चट्ठे, देसा इन्सां भंगीदास, भोला इन्सां, भिन्दर इन्सां, जंटा इन्सां, कृपाल इन्सां और शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग के सेवादार और समूह साध-संगत मौजूद थी।

    इस मौके विनती अरदास बोलने के बाद ‘शरीरदानी नाजर सिंह इन्सां अमर रहे’ नारों के साथ मृत देह को उनके निवास स्थान से काफिले के रूप में अंतिम विदाई दी। इस मौके बाबा रामदास जी ने बातचीत करते कहा कि आज के समय में शरीरदान से बड़ा कोई दान नहीं है। उन्होंने कहा कि जीते जी तो बहुत व्यक्ति होते हैं जो मानवता भलाई और मानवता के लिए काम करते हों, परन्तु बहुत थोड़े व्यक्ति होते हैं जो कि इस दुनिया से जाने के बाद भी अपना शरीर समाज सेवा के लेखे लगा देते हैं। उन्होंने इस महान प्रयास के लिए डेरा सच्चा सौदा की संस्था और परिवार की प्रशंसा की।

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