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    Relief Rules for Taxpayers: आयकर विधेयक 2025 की नई अपडेट! टीडीएस रिफंड के नियम और होंगे आसान?

    Income Tax Return
    Income Tax Return

    Income Tax Return 2025 Update: नई दिल्ली। अनेक मामलों में करदाताओं को स्रोत पर कर कटौती (TDS) की वापसी के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना पड़ता है, भले ही उनकी वार्षिक आय कर योग्य सीमा से कम हो। अब सरकार इस प्रक्रिया को और सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में करदाताओं को केवल टीडीएस रिफंड के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे इसके लिए एक सरल फॉर्म भरकर भी दावा कर सकेंगे। Relief Rules for Taxpayers

    आयकर विधेयक 2025 की समीक्षा कर रही प्रवर समिति ने सरकार को यह सुझाव दिया है कि केवल रिफंड के उद्देश्य से आईटीआर दाखिल करने की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। रिपोर्ट में इसका उल्लेख उन अधिकारियों के हवाले से किया गया है, जो इस कानून निर्माण प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह देखा गया है कि ऐसे कई छोटे करदाता हैं जिनकी आय कर योग्य नहीं है, लेकिन उनके वेतन या अन्य स्रोतों से टीडीएस काट लिया जाता है। ऐसे करदाताओं को सिर्फ़ जुर्माने से बचने के लिए रिटर्न दाखिल करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।”

    सरकार ने समिति के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है और इसे आयकर विधेयक 2025 में संशोधन के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार, सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) अब ऐसे करदाताओं के लिए एक सरल फॉर्म तैयार करेगा, जिन्हें केवल टीडीएस रिफंड का दावा करना होता है। यह नया फॉर्म फॉर्म 26AS से जुड़ा रहेगा, जो करदाता के खाते में स्रोत पर काटे गए कर और अन्य विवरणों का एक समेकित लेखा होता है।

    क्या है प्रवर समिति की सिफारिश? | Relief Rules for Taxpayers

    प्रवर समिति ने उस मौजूदा प्रावधान को हटाने की सिफारिश की है, जिसके अंतर्गत अध्याय 10 के तहत रिफंड चाहने वाले व्यक्ति को अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना होता है।

    इसके अलावा समिति ने आयकर अधिकारियों को करदाताओं के डिजिटल उपकरणों तक पहुँच देने वाले प्रावधानों में अधिक जवाबदेही और स्पष्टता जोड़ने की बात भी कही है। अभी तक आयकर अधिनियम, 1961 में डिजिटल डेटा या उपकरणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जिससे कई मामलों में कानूनी विवाद उत्पन्न हो जाते थे। नए विधेयक में कर अधिकारियों को अब स्पष्ट रूप से यह अधिकार होगा कि वे करदाता के डिजिटल रिकॉर्ड, लेखा-बही और अन्य दस्तावेज़ों की जांच कर सकें, लेकिन इसके लिए नियत प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

    कब से लागू होगा नया कानून? | Relief Rules for Taxpayers

    सूत्रों के अनुसार, आयकर विधेयक 2025 को आगामी 1 अप्रैल से लागू किया जा सकता है। इस विधेयक पर संसदीय समिति द्वारा कुल 285 सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें करदाताओं को राहत देने और कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर विशेष बल दिया गया है।