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    Flag Code of India: सूर्यास्त के बाद तिरंगा न उतारना अपराध नहीं, लेकिन फ्लैग कोड का उल्लंघन: हाईकोर्ट

    Flag Code of India
    Flag Code of India: सूर्यास्त के बाद तिरंगा न उतारना अपराध नहीं, लेकिन फ्लैग कोड का उल्लंघन: हाईकोर्ट

    (Flag Code of India: अनु सैनी। केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि सूर्यास्त के बाद राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) न उतारना अपने आप में कोई अपराध नहीं है, लेकिन यह भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) 2002 का उल्लंघन जरूर है।

    मामले की पृष्ठभूमि | Flag Code of India

    यह मामला वर्ष 2015 का है, जब अंगमाली नगर पालिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। उस समय नगर पालिका के सचिव के रूप में कार्यरत याचिकाकर्ता ने ध्वज को निर्धारित समय पर नहीं उतारा, और यह दो दिन तक उसी स्थिति में फहराता रहा।
    इस घटना के बाद अंगमाली पुलिस स्टेशन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक एफआईआर (FIR) दर्ज की और मामला राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) के अंतर्गत अदालत में पहुंचा। मजिस्ट्रेट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही शुरू की।याचिकाकर्ता ने इस कार्यवाही को रद्द करने के लिए केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    कानूनी प्रश्न

    न्यायालय के समक्ष मुख्य सवाल यह था कि –
    क्या सूर्यास्त के बाद ध्वज न उतारना राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 के तहत अपराध है?
    क्या यह कार्य Flag Code of India, 2002 के उल्लंघन के तहत दंडनीय है?
    न्यायालय का विश्लेषण
    1. राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 के प्रावधान
    इस अधिनियम की धारा 2(a) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान या अनादर करता है, तो यह अपराध माना जाता है।
    अदालत ने माना कि “अपमान” का अर्थ केवल तभी लागू होता है, जब कार्य जानबूझकर और ध्वज या राष्ट्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया जाए।
    केवल चूक (Negligence) या निष्क्रियता (Inaction) को “अपमान” नहीं माना जा सकता।
    2. इरादे (Intention) का महत्व
    कोर्ट ने कहा कि, जब तक यह सिद्ध न हो कि व्यक्ति ने जानबूझकर ध्वज को सूर्यास्त के बाद उतारने से मना किया या राष्ट्र का अनादर किया, तब तक इसे अपराध नहीं कहा जा सकता।
    इस मामले में, याचिकाकर्ता की ओर से कोई ऐसा इरादा साबित नहीं हुआ जिससे राष्ट्र की संप्रभुता या ध्वज की गरिमा को ठेस पहुंची हो।
    3. भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India), 2002
    यह संहिता केंद्र सरकार के कार्यकारी निर्देश (Executive Instructions) हैं, जो नागरिकों के लिए आचार संहिता के रूप में लागू होते हैं।
    यह संविधान के अनुच्छेद 13(3)(a) के तहत “कानून” (Law) की श्रेणी में नहीं आता, यानी इसका उल्लंघन अपने आप में आपराधिक अपराध नहीं बनता।
    ध्वज संहिता में यह जरूर प्रावधान है कि सूर्यास्त के बाद ध्वज को उतारना चाहिए, लेकिन इसके उल्लंघन के लिए कोई दंडात्मक (Penal) प्रावधान अधिनियम में शामिल नहीं है।
    कोर्ट का फैसला
    जस्टिस कौसर एडप्पागथ की एकल पीठ ने कहा:-
    सूर्यास्त के बाद ध्वज न उतारना केवल ध्वज संहिता का उल्लंघन है, लेकिन राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 के तहत अपराध नहीं है, जब तक कि यह जानबूझकर और अपमानजनक इरादे से न किया गया हो।
    इस मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं था कि उन्होंने ध्वज का अपमान करने का इरादा रखा हो।
    चूंकि अधिनियम के तहत यह अपराध सिद्ध नहीं होता, इसलिए उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जाता है।
    संवैधानिक पहलू
    न्यायालय ने यह भी माना कि राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान और गरिमा के साथ फहराने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) का हिस्सा है।
    हालांकि, अनुच्छेद 19(2) के तहत इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, खासकर जब राष्ट्र की संप्रभुता, एकता और गरिमा का सवाल हो।
    महत्वपूर्ण अवलोकन
    1. Flag Code का उल्लंघन बनाम अपराध – Flag Code का उल्लंघन अपने आप में अपराध नहीं है, जब तक कि कोई वैधानिक प्रावधान (Statutory Provision) न हो।
    2. इरादा (Mens Rea) जरूरी है – अपराध साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि व्यक्ति ने जानबूझकर राष्ट्र या ध्वज का अपमान करने की नीयत से काम किया।
    3. Flag Code एक आचार संहिता है – यह नागरिकों को ध्वज के सही उपयोग और गरिमा बनाए रखने के लिए निर्देश देता है, लेकिन इसके उल्लंघन के लिए अलग से कोई सजा तय नहीं है, जब तक कि 1971 के अधिनियम का उल्लंघन न हो।

    फैसले का प्रभाव

    यह फैसला इस बात को स्पष्ट करता है कि सिर्फ नियमों का उल्लंघन (Procedural Violation) करने पर किसी को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उस उल्लंघन में राष्ट्र का अपमान करने का स्पष्ट इरादा न हो।
    इससे सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों दोनों के लिए यह समझना आसान हो गया है कि कौन-सा कार्य वास्तव में कानूनी अपराध है और कौन-सा केवल आचार संहिता का उल्लंघन है।
    केरल हाईकोर्ट का यह निर्णय एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है — एक ओर यह ध्वज के सम्मान को बनाए रखने के महत्व पर जोर देता है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करता है कि केवल लापरवाही या अनजाने में हुई गलती को आपराधिक अपराध न माना जाए।
    इस तरह, न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि सूर्यास्त के बाद तिरंगा न उतारना अपराध नहीं है, लेकिन यह Flag Code का उल्लंघन है। अपराध तभी माना जाएगा, जब यह कार्य जानबूझकर राष्ट्र या ध्वज की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया हो।