
सरसा (सच कहूँ न्यूज)। गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एमएसजी गुरुकुल के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए भगवान गणेश के चरित्र और आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और ज्ञान के देवता हैं, जिनके जीवन से बच्चों और युवाओं को अनेक प्रेरणाएं मिलती हैं। पूज्य गुरुजी ने छात्रों को समझाया कि गणेश जी का हर गुण हमें जीवन जीने का सलीका सिखाता है। पूज्य गुरुजी ने कई वर्ष पहले मुंबई के लालबागचा राजा में गणेश चतुर्थी पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पर यादें ताजा करते हुए कहा, गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा मुंबई गूंज उठा था। स्थानीय लोगों ने उन्हें बहुत सम्मान दिया था, वह यादगार पल थे।
पूज्य गुरुजी ने गणेश जी के आदर्शों के बारे में छात्रों को बताया
नई चीजें सीखने की जिज्ञासा: गणेश जी हमेशा कुछ नया जानने के इच्छुक रहते थे। इसी वजह से उन्हें विद्या और ज्ञान का अधिष्ठाता माना गया। पूज्य गुरुजी ने छात्रों को उनकी तरह निरंतर सीखते रहने का प्रयास करने का संदेश दिया।
ज्ञान साझा करने की प्रवृत्ति: पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जैसे गणेश जी ने हमेशा अपने ज्ञान से सबको लाभान्वित किया, वैसे ही बच्चों को भी अपने सीखे हुए को दूसरों से बांटना चाहिए, क्योंकि ज्ञान बांटने से ही बढ़ता है।
दृढ़ता और संघर्ष : गणेश जी का जीवन कठिनाइयों का सामना करने का उदाहरण है। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पूज्य गुरुजी ने छात्रों को यही संदेश दिया कि असफलता से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य और मेहनत से मंजिÞल तक पहुँचना चाहिए।
विनम्रता और सरलता: अपार ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद गणेश जी विनम्र बने रहे। छात्रों को यह सीखना चाहिए कि सफलता मिलने पर भी घमंड नहीं करना चाहिए।
समस्या समाधान की क्षमता: गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। उन्होंने हर समस्या का हल अपनी चतुराई और बुद्धिमानी से निकाला। यह संदेश दिया गया कि बच्चों को भी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना और नए समाधान ढूँढना सीखना चाहिए।
संतुलन और एकाग्रता: गणेश जी का बड़ा सिर और छोटी आंखें प्रतीक हैं बड़े सोचने और ध्यान केंद्रित करने का। पूज्य गुरुजी ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई में मन लगाकर ध्यान भटकाने वाली चीजों से बचना चाहिए।
माता-पिता का आदर: गणेश जी का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग है जब उन्होंने पूरी दुनिया की परिक्रमा करने के बजाय अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा की और प्रथम पूज्य कहलाए। यह हमें सिखाता है कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान सर्वोपरि है।
शांत और सकारात्मक रहना: गणेश जी हमेशा मुस्कुराते रहते थे और दयालुता से सबको जोड़ते थे। छात्रों को भी मुश्किल वक्त में शांत रहकर और सकारात्मक सोचकर आगे बढ़ना चाहिए।
पूज्य गुरुजी का आह्वान
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां ने फरमाया कि यदि बच्चे भगवान गणेश की इन शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार लें तो वे न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि गणेश जी का आदर्श जीवन हमें यह सिखाता है कि बुद्धि और ज्ञान के साथ-साथ मेहनत,विनम्रता, दया, सकारात्मकता और माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान ही सफलता के मार्ग खोलता है।