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Wednesday, February 4, 2026
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    अपनी-अपनी जीत

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान आयोजित कार्यक्रम ‘हाउडी मोदी’ दोनों देशों की संयुक्त जीत न होकर दोनों नेताओं की अपनी जीत साबित हुई है। राजनीति और व्यापारिक मामलों में सुपरमैन माने जाते अमेरिकी राष्टÑपति अंतर्राष्टÑीय मामलों में भी अपने राजनीतिक हित साधने में माहिर हैं। इस क्षेत्र में ट्रंप का कोई मुकाबला नहीं था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्रंप की चालाकी के बावजूद भारत के हित को सुरक्षित रखने के साथ-साथ ओर मजबूत बनाने में भी सफलता प्राप्त की है। अंतर्राष्टÑीय मीडिया के साथ-साथ कुछ भारतीय मीडिया भी इस बात को उठा रहा था कि राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के नाम पर राष्टÑपति चुनावों में अमेरिकी भारतीयों का समर्थन लेने का प्रयास कर रहे हैं।

    इस कार्यक्रम में करीब 50 हजार प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया। कई आलोचक तो इसे ट्रंप की चुनावी रैली कह रहे हैं। मीडिया का प्रचार भी तत्थों पर आधारित था क्योंकि टंÑप की नीतियों व निजी विचारों के कारण वहां रहते भारतीय ट्रंप से परेशान थे। भले ही ट्रंप गैर-कानूनी प्रवासियों को निकालने की बयानबाजी करते रहे हैं लेकिन इस बयानबाजी का संदेश कानूनी तौर पर रहते भारतीयों के लिए भी गलत गया है।

    इसी तरह नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति से ट्रंप भारतीयों के गुस्से को ठंडा करने के साथ-साथ उनका दिल जीतने का भी प्रयास कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के माध्यम से कश्मीर मामले में जिस प्रकार अमेरिका का समर्थन लेने में कामयाबी हासिल की है वह अमेरिका के लिए एक यू-टर्न की तरह है जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। ट्रंप कई बार कश्मीर मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने के बयान दे रहे थे, अब उन्हें सार्वजनिक तौर पर यह बात कहनी पड़ी कि भारत-पाकिस्तान को कश्मीर मामले में अमेरिका की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप ने पाकिस्तान को इस बात के संकेत भी दिए कि भारत पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं से निपटने के सक्षम है। हाउडी मोदी कार्यक्रम के आलोचकों के भले ही कोई तर्क हों, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं कि भारत इस कार्यक्रम से कुछ प्राप्त करने में कामयाब रहा है। अपने हितों के बावजूद इस कार्यक्रम की एक और उपलब्धि यह है कि अमेरिका की धरती से एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया गया है।

     

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