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    गिलगित-बाल्टीस्तान पर पाकिस्तान की नई चालों को रोकना होगा 

    Pakistan

    भारत में हो रहे कृषि बिल विरोध व भारत-चीन सीमा पर बढ़ रहे तनाव को देखते हुए पाकिस्तान मौके का फायदा उठाने की फिराक में नई चाल चल रहा है। पाक की नई चाल में सेना व आईएसआई मुख्य भूमिका में बताए जा रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। संवैधानिक तौर पर पाक अधिकृत कश्मीर के फैसले भारत की संसद व सरकार करने का हक रखती है। लेकिन जिस दिन से भारत ने जम्मू एंड कश्मीर से धारा 370 समाप्त की है व जम्मू एंड कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा है उसी दिन से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। कभी पाकिस्तान भारत के जम्मू कश्मीर व जूनागढ़ को अपने नक्शे में दिखाता है कभी गिलगित बाल्टिस्तान जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है को अपना अपना प्रांत घोषित कर वहां चुनाव करवाने की बात करता है।

    ताजा विवाद में पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक दलों को बुलाकर गिलगित-बाल्टीस्तान को नया प्रांत बनाने व चुनाव कराने का उन पर दबाव डाला है, हालांकि इस बात पर पीपीपी नेता बिलावल जरदारी भुट्टो सेना प्रमुख से भिड़ गए बताए जाते हैं। बिलावल का विरोध था कि सेना कैसे राजनीतिक दलों को आदेश दे सकती है? बिलावल ने बाजवा को स्पष्ट किया कि पाक सेना 1971 की गलती कर रही है, जब बांग्लादेश को आजाद करना पड़ा था। पाकिस्तानी अपनी सरजमीं पर बैठकर भारत के भू-भाग का अगर निर्णय करते हैं तब यह भारत को सीधी चुनौती है कि पहले व उनका भू-भाग दबाया व अब वह वहां चुनाव करवाएंगे। भारत सरकार को चाहिए कि वह अपने उस प्रण को याद करे जब संसद में सरकार ने देश को भरोसा दिया था कि भारत विदेशी कब्जे अपनी जमीन का एक-एक इंच वापिस लेकर रहेगा।

    पाकिस्तान को भारत की ओर से सख्त ही नहीं आक्रमक संदेश जाना चाहिए कि अगर वह भारत के किसी भी भू-भाग से जरा सी भी छेड़छाड़ करेगा तो इसके गंभीर परिणाम पाकिस्तान को भुगतने होंगे। इस बात में भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान की गिलगित-बाल्टीस्तान को लेकर हो रही नई कशमकश पीछे कहीं न कहीं चीन भी है। चूंकि चीन ने ग्वादर बंदरगाह तक जो हाइवे बनाया हुआ है उसका काफी हिस्सा गिलगित-बाल्टीस्तान से होकर गुजर रहा है जबकि गिलगित-बाल्टीस्तान भारत का भू-भाग है। पाक की नापाक हरकतों को रोकने के लिए भारत को राजनीतिक, आर्थिक, सामरिक, कूटनीतिक तौर पर तत्काल सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि पाकिस्तान को संदेश जाए कि वह भारत के भू-भाग में फेरबदल करने या चुनाव करवाने की अपनी बदनीयत चालें छोड़ दे।

     

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