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    कहां पर लिया था नाम हजूर पिता जी ने, जानें रोचक जानकारी

    MSG Bhandare

    डेरा सच्चा सौदा के पूज्य हजूर पिता संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Baba Ram Rahim) ने साध-संगत पर एक और परोपकार किया है। पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा ने सत्संग के दौरान 25 मार्च को पवित्र भंडारा मनाने का अपने पवित्र मुखारविंद से वचन फरमाया। जैसी पूज्य गुरु जी ने अपने पवित्र मुखारविंद से अनाउंस किया तो साध – संगत की खुशियों का ठिकाना न रहा।

    हर सत्संगी प्यारे सतगुरु जी का, अपने प्यारे मुर्शिद जी का करोड़ों- करोड़ों बार धन्यवाद कर रहा था। वैसे तो साध-संगत 25 जनवरी , 28 फरवरी , 29 अप्रैल 15 अगस्त और नवंबर में भंडारे मनाती आ रही है। पर सतगुरु जी ने 25 मार्च का भंडारा बख्स कर एक और बड़ा परोपकार किया है।‌ पूज्य गुरु जी ने इस पवित्र भंडारे को पावन एमएसजी भंडारे का नाम दिया है जो करोड़ों साध-संगत पहली बार यह भंडारा मनाने जा रही है । डेरा सच्चा सौदा के इतिहास में पहली बार 25 मार्च को यह भंडारा मनाया जाएगा।

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    परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने पूज्य गुरुजी को बख्शी नाम की पवित्र अनमोल दात

    परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने इस दिन पूज्य गुरु जी को नाम की पवित्र अनमोल दात बख्सी थी। पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने पवित्र मुखारविंद से वचन फरमाते हुए कहा कि हम 25 मार्च को भी एमएसजी भंडारे के रूप में मनाया करेंगे । पूज्य गुरु जी ने वचन फरमाते हुए कहा कि परमपिता जी ने यह वचन किए थे कि हम थे , हम हैं और हम ही रहेंगे । तो वह दिन आपने कहा था बहुत सारे सेवादारों ने कि पिताजी हर महीने हमें सेवा का मौका दिया करें। हर महीने में हम खुशीयाँ पाना चाहते हैं । जिस दिन हम आए थे उस दिन भी यह बोला गया था । और आज भी सारे बच्चे सामने बैठे हैं, हाथ खड़े कर रहे है। साध-संगत जी य‌ह एमएससी वर्ड बना है उसका कारण यह मार्च महीना भी है ।‌ और इस महीने में परम पिता शाह सतनाम जी दाता रहबर ने जो आपके हम सेवादार हैं।

    अब तो परम पिता जी इस बॉडी से काम ले रहे हैं । लेकिन इस खाक को 25 मार्च 1973 में गुरु मंत्र दिया था। अपने साथ जोड़ा था। सत्संग का महीने का लास्ट और क्योंकि कई लोग यह जानना भी चाह रहे थे कि गुरु जी को गुरु मंत्र कब मिला था । उस समय हम लगभग – लगभग 5 साल के रहे होंगे । परम पिता जी ने गुरु मंत्र दिया था अपने पास बुला के। तेरा वास जो शाह मस्ताना जी धाम है। जो होल की तरफ गेट है उस तरफ वहां खाली जगह थी और वहां कनाते लगी हुई थी । जैसे होल है उनकी तरफ परम पिता जी का बायां हाथ था और और बेपरवाह जी का मुखड़ा पंडाल की तरफ था।‌ तो हम वहां बैठे थे।‌ बापू जी भी साथ थे। हम दोनों ही आए थे।

    तो फिर घूम-घुमा कर आए जब गुरु मंत्र दिया। तो बेपरवाह जी आकर बैठ गए। और बेपरवाह जी ने यह जरूर फरमाया था कि काका तूं इत्थे आके बैठ। बेपरवाह जी के पास बैठे थे तो वह 25 मार्च का दिन था । हमें याद आता है कि महीने का और लास्ट सत्संग था। तो इसलिए आपके लिए यह खुशी का दिन की एमएसजी। बेपरवाह जी ने बना दिया गुरु मंत्र देकर ही । उनका रहमों करम । मैसेंजर आॅफ गॉड नहीं। वो परमपिता जी ने वचन किए थे कि हम थे हम हैं और हम ही रहेंगे। तो एम से बेपरवाह शाह मस्ताना जी का नाम एस से बेपरवाह शाह सतनाम सिंह जी का नाम, और जी से इस बॉडी का नाम जो चला रहे हैं हमारा नाम रखा।‌ पूरा कंप्लीट हो गया एम एस जी ।‌ इसका नाम ही एमएसजी हमने रख दिया। उन्होंने बनाया आपके लिए यह खुशी का महीना है।

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