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Tuesday, April 7, 2026
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    World Health Day Special: स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाए रखने के लिए करें ये दो जरुरी काम

    World Health Day

    मिलेट्स खाएं और प्रतिदिन करें सैर

    World Health Day Special: गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। विश्व स्वास्थ्य दिवस…। यह कहने, मानने या मनाने भर से ही कोई व्यक्ति सेहतमंद नहीं हो जाता। इसके लिए अपने जीवन में कुछ नियमों का पालन करना होगा। कुछ खास चीजों को खाने की आदत डालनी होगी। कुछ चीजों से परहेज करना होगा और कुछ का व्रत करना होगा। अच्छी सेहत व स्वास्थ्य के लिए नियमित सैर करना जरूरी है। साथ ही मिलेट्स खाएं और मोबाइल फोन का व्रत करें। ऐसा करके आज के तनाव भरे जीवन में खुद को स्वस्थ बना सकते हंै। तभी विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्य भी पूरा होगा। भारत का संविधान जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें बुनियादी मानव अधिकार के रूप में स्वास्थ्य का अधिकार भी है। World Health Day

    ऐेसे में हमें ना केवल इस अधिकार की ही सुरक्षा चाहिए, बल्कि सेहतमंद रहकर हमें खुद को भी सुरक्षित रखना चाहिए। खुद को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहला नियम यही है कि व्यक्ति रात को समय से सोये और सुबह जल्दी उठकर सैर और व्यायाम को अपनी दिनचर्या बनाए। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए रोजाना 20 से 30 मिनट की सैर कर लेना काफी है। इससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) व कोलेस्ट्रोल नियंत्रित रहेगा। ऐसा करके हम ह्दय रोगों का खतरा काफी हद तक कम कर सकते हैं। सुबह की ताजी हवा और व्यायाम से एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होते हैं, जिनसे तनाव व चिंता कम होती है। पूरे दिन व्यक्ति ऊर्जावान रहता है।

    खान-पान में दूध-दही व फास्टफूड के लाभ-हानि | World Health Day

    आज के भागदौड़ भरे जीवन में हम अपने पौराणिक, पारंपरिक खान-पान से दूरी बना चुके हैं। यह दूरी हमारी सेहत के लिए हानिकारक होती जा रही है। सुबह से लेकर रात को सोते-सोते भी लोगों के खाने के मैन्यु में फास्टफूड होता है। खाने की यही आदत हमारे जीवन को जल्द समाप्ति की ओर ले जा रही है। असमय मौतों का कारण भी फास्टफूड है। अनेक बीमारियों व्यक्ति को फास्टफूड के कारण लग रही हैं। बड़े ही नहीं बच्चे भी फास्टफूड के कारण बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसलिए खान-पान की इस आदत में बदलाव जरूरी है।

    बात करें दूध की तो इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन-डी भरपूर मात्रा में होता है। यह हड्डियों एवं दांतों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही दूध मांसपेशियों के विकास, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने, अच्छी नींद और त्वचा बेहतर बनाता है। अगर हम रोजाना एक-दो गिलास गुनगुना दूध पीते हैं तो यह हमारी सेहत के लिए अमृत का काम करता है। दही की बात करें तो यह सच में एक स्वादिष्ट एवं सुपरफूड है। सुबह और दोपहर तक ही दही का सेवन करना लाभकारी होता है।

    सेहत सुधार सकता है ऑर्गेनिक, मिलेट्स का सेवन | World Health Day

    आर्गेनिक और मिलेट्स (मोटा अनाज जैसे रागी, बाजरा, ज्वार) को भी व्यक्ति के खान-पान में उचित स्थान मिलना चाहिए। इसका सेवन पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट के कारण पाचन सुधारने, वजन घटाने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और दिल को स्वस्थ रखने में बेहद फायदेमंद है। ये उत्पाद ग्लूटेन मुक्त होते हैं। साथ ही रसायनों से मुक्त होने के कारण कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करते हैं। मिलेट्स में उच्च फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और पेट के विकारों से बचाता है। डायबिटीज प्रबंधन की बात करें तो  इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। यह टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। कम कैलोरी और उच्च फाइबर के कारण ये लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

    गुरुग्राम के पार्कों में घूमकर, कसरत से सेहतमंद बनते हैं लोग

    महानगर बन चुके गुरुग्राम में वैसे तो गगनचुंबी इमारतों के रूप में कंक्रीट के जंगल खड़े हो चुके हैं, इसके बावजूद यहां पर समाजसेवी संस्थाओं, आरडब्ल्यूए के स्तर पर हरियाली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सेक्टर्स व कॉलोनियों में पार्कों का रखरखाव करके लोगों की सुबह-शाम को बेहतर बनाया जाता है। गुरुग्राम में बड़े पार्कों में सेक्टर-29 लेजरवैली पार्क, सेक्टर-14 का सुभाष पार्क, सेक्टर-23 का ताऊ देवीलाल पार्क, सेक्टर-7 का पार्क, सेक्टर-10 का पार्क समेत अनेक ऐसे पार्क हैं, जहां लोग भ्रमण, कसरत करते हुए अपना समय व्यतीत करते हैं। इन पार्कों की स्थिति भी अच्छी है। गुरुग्राम का सबसे भव्य और विशाल पार्क सेक्टर-29 का पार्क है।

    मोबाइल की लत नुकसानदायक: अभय जैन | World Health Day

    मानव आवाज संस्था के संयोजक अभय जैन एडवोकेट कहते हैं कि मोबाइल तब तक सही है, जब तक उसका सदुपयोग किया जाए। दुरुपयोग जब होता है तो बड़ी समस्या खड़ी होती है। उन्होंने कहा कि कोविड के समय से मोबाइल शैक्षणिक गतिविधियों में पहले से अधिक इस्तेमाल होने लगा है। मोबाइल को सूचनाओं का आदान-प्रदान और ज्ञान लेने तक उपयोग किया जाना सही है। इसके सभी पक्षधर हैं। लेकिन आज के समय में मोबाइल युवाओं और बच्चों के लिए लत बन गया है। जिस तरह से लोग अन्य नशे करते हैं, वैसे ही मोबाइल हो गया है। मानसिक अवसाद के साथ यह दुर्घटनाओं का भी कारण बन रहा है।

    इंटरनेट मीडिया से अपराध की राह पकड़ रहे युवा: शील मधुर

    पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शील मधुर ने कहा कि मोबाइल की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है। यह अपराध, वित्तीय हानि और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी है। ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में साइबर बुलिंग, आत्महत्या के मामले और मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इंटरनेट मीडिया पर बहुत सी ऐसी सामग्री परोसी जाती है, जिसे देखकर युवा भटक भी सकते हैं। अक्सर यह देखने में भी आता है कि अपराध करने पर पकड़े जाने वाले युवा इंटरनेट मीडिया पर वीडियो देखकर उस अपराध को करना स्वीकार करते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने बच्चों पर मोबाइल के उपयोग के समय नजर भी रखें।

    नवजात बच्चे भी मोबाइल के आदी, यह सही नहीं: डॉ. विजय

    शिक्षाविद् डॉ. विजय सिंह चौहान का कहना है कि आज के समय में नवजात बच्चों को भी मोबाइल की लत लगाई जा रही है, जो उनके जीवन के लिए नुकसानदायक है। छोटे बच्चों द्वारा मोबाइल चलाने को माता-पिता अपनी शान समझते हैं। आज की युवा पीढ़ी मोबाइल के चंगुल में फंसी हुई है। शैक्षणिक गतिविधियों के लिए तो मोबाइल ठीक है, लेकिन और भी बहुत सी ऐसी चीजें आज इंटरनेट के माध्यम से परोसी जा रही हैं, जो हमारे सभ्य समाज के लिए सही नहीं।

    मोबाइल की लत ना लगाएं, इसका सदुपयोग करें: डॉ. बजाज

    बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हनीष बजाज कहते हैं कि बच्चे हो या बड़े, स्क्रीन टाइम जितना अधिक होगा, समस्याएं उतनी अधिक बढ़ेंगी। मोबाइल के उपयोग के समय स्क्रीन ब्रेक होना चाहिए। हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। यानी 20-20-20 का नियम अपनाएं। माता-पिता को बच्चों के साथ बिना स्क्रीन के समय बिताना चाहिए, इससे उनका ग्रोथ अच्छी होती है। परिवार में संबंध भी अच्छे रहते हैं। World Health Day