कविता : एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ

0
641

एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ,
रटवाती थी हमको बुआ।

टू वन जा टू, टूटू जा फोर,
लगता यारों कितना बोर।

क से कबूतर, ख से खरगोश,
पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश।

ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट,
मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट।

उतरी हिन्दी की पगड़ी,
पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी।

डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।