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    जीत के लिए खूब पसीना बहा रही भिवानी के गांव निमड़ीवाली की पूजा बोहरा

    Pooja-Bohra

    ओलंपिक के मंच पर दिखेगा हरियाणवीं छोरी का दमदार पंच

    (Pooja Bohra Bhiwani)

    • ग्रीन कार्ड से एंट्री पाने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर

    भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। हरियाणा की बेटियां किन्ही भी मायनों में बेटों से कम नहीं हैं। पिछले ओलंपिक में प्रदेश की बेटियों ने जहां रेसलिंग में अपनी धूम मचाई थी, वहीं की बेटियां अबकी बार मुक्केबाजी में भी अपना दम दिखाएंगी। भिवानी जिले के गांव निमड़ीवाली की मिडल वैट (75 किग्रा. भार वर्ग) महिला मुक्केबाज पूजा बोहरा देश के लिए ओलंपिक में मुक्के का दम दिखाएगी। भीम अवार्डी होनहार खिलाड़ी 23 जुलाई से शुरू होने वाले ओलंपिक खेलों की तैयारियों में जुटी और कड़ी मेहनत कर रही है। ग्रीन कार्ड से इंट्री करने वाली पूजा बोहरा पहली मुक्केबाज ओलंपियन हैं। इससे पूर्व मैरीकोम ओलंपिक खेलों में रेड कार्ड से इंट्री पाने में सफल हुई थी। इस होनहार खिलाड़ी से पूरा देश पदक की उम्मीद लगाए हुए है।

    बचपन में परिवार से ही मिला खेलों का माहौल

    पूजा का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता राजबीर हरियाणा पुलिस में एएसआई हैं तथा माता दमयंती गृहिणी है। पूजा बोहरा के पिता फुटबॉल के खिलाड़ी रह चुके हैं। ऐसे में खेलों के प्रति पूजा बोहरा की रूचि बचपन से ही है। पूजा बोहरा के ओलंपिक क्वालीफाई करने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है।

    कभी बास्केट बॉल खेलती थी पूजा

    पूजा के पिता राजबीर, माँ दमयंती ने बताया कि पूजा जब कॉलेज में पढ़ती थी, उस वक्त वो बास्केबॉल खेलती थी। इसके बाद बॉक्सिंग कोच संजय श्योराण के आग्रह पर मुक्केबाजी में हाथ आजमाया। एक बार उसे अपनी मुक्के की ताकत का पता चला तो उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    माँ को था चेहरा खराब होने का डर

    पूजा की माता दमयंती कहती हैं कि जब पूजा ने मुक्केबाजी शुरू की तो एक माँ होने के नाते उनके मन में एक डर पैदा हो गया था कि मुंह पर चोट आदि लगने से कहीं उनकी बेटी की शादी में परेशानी न हो। लेकिन पूजा ने विश्वास दिलाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा और वो खेल के माध्यम से देश का नाम चमकाएगी। अपनी इस बात को उसने आगे चलकर साबित भी किया।

    शुद्ध शाकाहारी है होनहार खिलाड़ी

    माँ के अनुसार पूजा के लिए उन्होंने घर में देशी नस्ल की दो गाय पाल रखी हैं, जिनका दूध पीकर वह ओलंपिक तक पहुंची है। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी अपने घर में कभी भी मांसाहार के लिए स्थान नहीं दिया तथा पूजा को भी घर में शाकाहारी भोजन ही दिया।

    सपना किया साकार

    भीम अवॉर्डी कोच संजय श्योराण कहते हैं कि पूजा के अंदर बचपन से ही खेलों के प्रति गहरी रूचि थी। उसका सपना था कि वो विदेशोंं तक खेलकर आए तथा देश-दुनिया को देखे। आज वो अपना सपना ओलंपिक खेलों में पहुंचकर पूरा कर पा रही है। पूजा ने दिखा दिया है कि अगर बेटियों को सुविधाएं और अवसर उपलब्ध करवाए जाएं तो वो भी आपका नाम दुनिया में चमका सकती हैं।

    एक्साईज एंड टैक्ससेशन विभाग में हैं इंस्पेक्टर

    पूजा बोहरा के शानदार खेल और उपलब्धियों की बदौलत हरियाणा सरकार ने उन्हें भीम अवार्ड से सम्मानित किया। वहीं ये युवा मुक्केबाज फिलहाल एक्साईज एंड टैक्ससेशन विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है और खेल के साथ-साथ अपनी ड्यूटी को पूरी शिद्दत के साथ निभाती हैं।

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