उपभोक्ता की मर्जी को किया जा रहा नजरअंदाज,विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का कानूनी अधिकार
- जनपद में स्मार्ट मीटर व्यवस्था से उपभोक्ता परेशान,बिना जानकारी बिजली कटने से भी बढ़ीं मुश्किलें
गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad Bijli Meter News: राजधानी से सटे जनपद गाजियाबाद में स्मार्ट मीटर व्यवस्था से उपभोक्ता परेशान है और पोस्टपेड से प्रीपेड में निरंतर बदले जा रहे हैं। जिसकी बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ता को कोई जानकारी तक नहीं दी जा रही। बिजली विभाग सरकार का आदेश बताकर पल्ला झाड़ रहा है। उपभोक्ता की प्रथमिकता को भी नहीं जाना जा रहा, न उपभोक्ता से पूछा ही जा रहा है कि वो प्रीपेड मीटर लगवाना चाहता भी है या नहीं। जबकि उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का कानूनी अधिकार है। अपने निर्धारित कमीशन के लिए चोरी छिपे मीटर बदलने में कार्यदायी कंपनी जुटी हुई है।
जिससे उपभोक्ता परेशान है। बिना पूरी तैयारी के स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने के बाद शहर के उपभोक्ताओं को नए नियम और प्रीपेड व्यवस्था समझने में काफी दिक्कत हो रही है। पोस्टपेड से प्रीपेड व्यवस्था में बदलाव के बाद कई उपभोक्ताओं का कनेक्शन बैलेंस नेगेटिव होते ही कट जाता है, जबकि उन्हें इस बारे में कोई अग्रिम जानकारी नहीं दी जाती।सिस्टम के अनुसार नेगेटिव बैलेंस को पॉजिटिव करने के लिए दोगुना रिचार्ज करना पड़ता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इससे पहले वे पूरे महीने बिजली इस्तेमाल के बाद भुगतान करते थे, लेकिन अब पुराने बकाया और अग्रिम बैलेंस को मिलाकर अधिक रिचार्ज करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, दो हजार रुपये नेगेटिव बैलेंस होने पर चार हजार रुपये तक रिचार्ज करना पड़ता है।
जागरूकता अभियान और डेमो का अभाव | Ghaziabad News
उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने के समय न तो कोई डेमो दिया गया और न ही लिखित सूचना प्रदान की गई। बिजली विभाग द्वारा मोहल्ला स्तर पर जागरूकता अभियान, पम्पलेट या कैंप नहीं चलाए जाने से लोग सीधे संकट में पड़ गए।
रिचार्ज के बावजूद बिजली नहीं मिलना बड़ी समया
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि नेगेटिव बैलेंस चुकाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई। यूपीपीसीएल कंज्यूमर ऐप से रिचार्ज करने पर भी घंटों तक भुगतान आरएमएस पोर्टल पर अपडेट नहीं होता। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह सर्वर में खराबी के कारण हो रहा है।
स्मार्ट/प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता नहीं
बिजली दर (टैरिफ) आदेश में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट/प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता विद्युत अधिनियम 2003 में कहीं भी नहीं है, और उपभोक्ता के अधिकार सर्वोच्च हैं। और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत, उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का कानूनी अधिकार है।
कोर्ट और नियामक आयोग के प्रमुख निर्देश
- उपभोक्ता के पास विकल्प का अधिकार: उपभोक्ता के पास प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का पूर्ण अधिकार है, इसे थोपा नहीं जा सकता
विभाग का कहना: शुरुआती दिक्कतें सामान्य
पवन अग्रवाल, मुख्य अभियंता जोन-प्रथम, ने बताया कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था नई है, इसलिए प्रारंभिक समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि जिनके घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगे हैं, वे लगभग एक महीने के बिजली बल के बराबर रिचार्ज कर लें, ताकि स्वचलित विद्युत विच्छेदन से बचा जा सके।
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