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    पंजाब वाले कर रहे हरियाणा को बदनाम : सुरेंद्र शर्मा बड़ौता

    Punjab is maligning Haryana Surendra Sharma Baruta

    हरियाणा के लोग देशभक्त, अपनी गलती हरियाणा पर ना थोपे पंजाब

    • किसान संगठन बलबीर राजेवाल को अपने मंच से करें प्रतिबंधित

    पानीपत। : ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा बड़ौता ने कहा कि लाल किले पर तिरंगे की घटना को अंजाम देने के बाद अब पंजाब के लोग हरियाणा वालों को बदनाम करने पर तुले हुए है । पंजाब के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने हरियाणा के किसानों के बारे में जो जहर उगला हैं वह हरियाणा के लोग कभी सहन नहीं करेंगे।  उन्होंने कहा कि 26 जनवरी के मौके पर जिन लोगों ने शर्मनाक घटना को अंजाम दिया हैं उन्हें पूरी दुनिया ने देखा हैं लेकिन किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल इसका दोष हरियाणा वालों पर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आज़ खालिस्तान की मांग कर रहे है, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होनी चाहिए ।

    माफ़ी नहीं मांगी तो ब्रह्मण सभा उतरेगी सड़कों पर

    ब्राह्मण सभा के प्रधान सुरेंद्र शर्मा बड़ौता ने कहा कि हरियाणा के लोगों ने पंजाब को हमेशा ही बड़े भाई का दर्जा दिया है लेकिन बलबीर सिंह का हरियाणा के किसानों को सरकार का मोहरा बताना, गैर जिम्मेदारी वाला विवादिय बयान है । उन्होंने कहा कि बलबीर सिंह को हरियाणा के किसानों से माफ़ी मांगनी चाहिए। यदि उन्होंने माफ़ी नहीं मांगी तो ब्राह्मण सभा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगी।

    इतिहास गवाह है कि हरियाणा के किसानों ने हमेशा ही हर आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से किया है । लेकिन बलबीर सिंह जैसे लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है । उन्होंने किसान संगठनों से भी मांग की है कि इस तरह की हरियाणा के लोगों के प्रति ऐसी मानसिकता रखने वालों से बचकर रहे । ऐसे लोगों को तुरंत अपने मंच पर प्रतिबंधित करें अन्यथा हरियाणा के भोले भाले किसानों को ऐसे ही गुमराह किया जाता रहेगा ।

    हरियाणा के किसानों से अपील : ऐसे नेताओं के बहकावे में ना आये

    सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि 26 जनवरी को मनाए जाने वाला गणतंत्र दिवस साधरण दिन नहीं है। यह वह दिन है जब हमारे भारत देश को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई थी, क्योंकि भले ही देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया था, लेकिन यह पूर्ण रूप से स्वतंत्र तब हुआ जब 26 जनवरी 1950 के दिन ‘भारत सरकार अधिनियम’ को हटाकर भारत के नवनिर्मित संविधान को लागू किया गया।

    उस दिन से 26 जनवरी के इस दिन को भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। किसान आंदोलन की आड़ में राजनीतिक दलों व देश विरोधी विचार धारा के समर्थकों ने राष्ट्रीय पर्व पर उपद्रव कराकर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई है! यह दिवस असंख्य कुर्बानियां देने के बाद हमें प्राप्त हुआ है।

    देश के सभी नागरिकों के लिए यह गर्व का दिन है, गणतंत्र दिवस का दिन भारत के राष्ट्रीय पर्वों में से एक है, यहीं कारण है कि इसे हर जाति तथा संप्रदाय द्वारा काफी सम्मान और उत्साह के साथ मनाया जाता है। देश की गरिमा किसान के लिए सर्वोपरि है।

    इस दिन होने वाले आयोजन हमें आजादी व हमारे गणतंत्र के महत्व का अहसास कराते हैं। यहीं कारण है कि इसे पूरे देश भर में इतने जोश तथा उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके साथ ही यह वह दिन भी है जब भारत अपने सामरिक शक्ति का प्रदर्शन करता है, जोकि किसी को आतंकित करने के लिए नहीं अपितु इस बात का संदेश देने के लिए होता है कि हम अपनी रक्षा करने में सक्षम हैं।

    26 जनवरी का यह दिन हमारे देश के लिए एक ऐतहासिक पर्व है इसलिए हमें पूरे जोश तथा सम्मान के साथ इस पर्व को मनाना चाहिए। इस दिन को हमारे देश के आत्मगौरव तथा सम्मान से भी जोड़ा जाता है, इसलिए पर्व का विरोध गलत है। आज के समय यदि हम स्वतंत्र रुप से कोई भी फैसला ले सकते हैं या फिर किसी प्रकार के दमन तथा दुर्वव्यस्था के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं, तो ऐसा सिर्फ हमारे देश के संविधान और गणतांत्रिक स्वरुप के कारण संभव है। यहीं कारण है कि हमारे देश में गणतंत्र दिवस को एक राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाया जाता है।

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