‘Rang Barse’ मुंबई। समय के साथ उत्सव मनाने के तौर-तरीके बदलते रहे हैं, परंतु कुछ गीत ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों को जोड़ते हुए परंपरा का जीवंत प्रतीक बन जाते हैं। होली के अवसर पर जब रंगों की बौछार शुरू होती है, तब जिस धुन की सबसे पहले याद आती है, वह है ‘रंग बरसे’। चार दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह गीत उत्सव की पहचान बना हुआ है। यह प्रसिद्ध गीत वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म सिलसिला का हिस्सा था, जिसमें महान अभिनेता अमिताभ बच्चन पर इसे चित्रित किया गया। अपनी चुटीली शैली, लोकधुनों की मिठास और पारंपरिक होली की छटा के कारण यह गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का स्वरूप ले चुका है। Holi 2026
क्यों खास है ‘रंग बरसे’ ‘Rang Barse’?
यह गीत केवल रंगों की मस्ती नहीं दर्शाता, बल्कि उन अनकहे भावों को भी अभिव्यक्त करता है जो उत्सव के उल्लास में सहज रूप से बाहर आ जाते हैं। इसकी पंक्तियों में शरारत है, अपनापन है और ग्रामीण होली की आत्मा बसती है। यही कारण है कि आधुनिक डीजे युग में भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई।आज जब ‘बलम पिचकारी’ या ‘डू मी अ फेवर लेट्स प्ले होली’ जैसे गीत पार्टियों में गूंजते हैं, तब भी पारिवारिक आयोजनों और सोसायटी समारोहों में ‘रंग बरसे’ का स्थान सबसे ऊपर रहता है। सोशल मीडिया मंचों पर भी इस गीत की व्यापक उपस्थिति देखी जा सकती है। विशेष रूप से ‘सोने की थाली में जोना परोसा’ पंक्ति पर असंख्य लघु वीडियो बनाए जा रहे हैं।
नए संस्करण, पर मूल की चमक बरकरार | Holi 2026
वर्षों में इस गीत के अनेक संस्करण और रूपांतरण प्रस्तुत किए गए—भक्ति शैली से लेकर क्षेत्रीय भाषाओं तक। किंतु मूल रचना की आत्मा और माधुर्य अब भी अप्रतिम है। होली के अवसर पर यह गीत यूट्यूब और अन्य मंचों पर पुनः लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच जाता है। विशेषज्ञों का मत है कि त्योहारों से जुड़े गीत तभी अमर बनते हैं जब वे भावनाओं से जुड़ते हैं। ‘रंग बरसे’ ने यही कार्य किया है—यह केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है। आज जब हर त्योहार के लिए नए गीतों की प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है, तब भी होली का अनौपचारिक प्रतीक यही गीत है। आने वाले वर्षों में भी जब रंगों की फुहार उड़ेंगी और ढोलक की थाप बजेगी, तब संभावना है कि उत्सव की शुरुआत उसी परिचित स्वर से होगी—“रंग बरसे भीगे चुनर वाली…”। Holi 2026















